होर्मुज जलडमरूमध्य में इस समय एक भीषण पर्यावरणीय आपदा का मंजर दिखाई दे रहा है क्योंकि समुद्र में तेल का रिसाव लगातार जारी है। यह 'काला जहर' समुद्र में बहुत तेजी से फैल रहा है और ताजा रिपोर्टों के अनुसार तेल वाला पानी ईरान के केश्म द्वीप और सिरी द्वीप के तटों तक पहुंच चुका है। इस तबाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान के पास लगभग 300 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में तेल फैल चुका है। अनुमानों के मुताबिक होर्मुज के पानी में अब तक 3 लाख 80 हजार लीटर तेल बह चुका है और यह रिसाव जहाजों पर होने वाले लगातार हमलों का परिणाम है।
ओमान और ईरान के तटों पर संकट
तेल के इस रिसाव का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं है बल्कि ओमान के तटों पर भी समुद्र में फैला हुआ तेल साफ देखा जा सकता है। ओमान के पास लगभग 390 वर्ग किलोमीटर के समुद्री क्षेत्र में तेल की परत जम गई है। कुल मिलाकर देखा जाए तो होर्मुज में करीब 2000 वर्ग किलोमीटर का विशाल इलाका इस तेल रिसाव से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ओमान में यह स्थिति समुद्री जीवों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन गई है और विशेषज्ञों का कहना है कि अब होर्मुज के इन रास्तों से जहाजों का गुजरना भी बेहद मुश्किल और जोखिम भरा हो सकता है।
हमलों का शिकार हुए तेल टैंकर
होर्मुज में वर्तमान में दो प्रमुख तेल टैंकरों से रिसाव हो रहा है। दरअसल ईरान ने मिनोअन पायनियर और कैरोलीन बेजेंगी नाम के दो टैंकरों को अपना निशाना बनाया था जिसके बाद 3 अगस्त से समुद्र में तेल का रिसाव शुरू हुआ। इन दोनों टैंकरों पर हमला ओमान के करीब किया गया था लेकिन समुद्र की लहरों के साथ बहकर यह तेल ईरान के तटों तक पहुंच गया। इस प्रकार यह तेल अब ओमान से लेकर ईरान तक के एक बड़े समुद्री हिस्से को अपनी चपेट में ले चुका है और रिसाव रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
जहाजों के संचालन में तकनीकी बाधाएं
तेल टैंकरों पर हमले करने के बाद ईरान ने शायद यह नहीं सोचा था कि उसके अपने द्वीप और तट भी इस तेल रिसाव की चपेट में आ जाएंगे। अब स्थिति यह है कि ईरान खुद ही अपने बुने जाल में फंस गया है। अब ईरान के लिए अपने शैडो फ्लीट के जरिए तेल बेचना भी चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि तेल की मौजूदगी में जहाज चलाना खतरनाक है। जहाज के इंजन से निकलने वाली चिंगारी से समुद्र की सतह पर तैर रहे तेल में आग लगने का डर बना रहता है। इसके अलावा जहाजों के इंजन को ठंडा करने के लिए जो पानी खींचा जाता है उसके साथ तेल अंदर जाने से इंजन पूरी तरह खराब हो सकते हैं।
सफाई अभियान में अंतरराष्ट्रीय अड़चनें
रिपोर्ट्स के अनुसार समुद्र में तेल का बहना लगातार जारी है और स्थिति हर बीतते पल के साथ गंभीर होती जा रही है और ओमान के अलावा अभी तक किसी भी देश या अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने इस रिसाव को रोकने या समुद्र की सफाई करने का कोई मिशन शुरू नहीं किया है। इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है। इसके साथ ही ड्रोन हमलों के डर से कोई भी अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी या क्लीन-अप क्रू समुद्र में उतरने का साहस नहीं जुटा पा रहा है जिससे यह पर्यावरणीय संकट और गहराता जा रहा है।
यूएई के टैंकर और अंडरवाटर ड्रोन का नया खतरा
इस तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के तेल टैंकरों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। हालांकि इन टैंकरों को हुए नुकसान की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है लेकिन यदि यूएई के टैंकरों से भी रिसाव शुरू हुआ तो स्थिति और भी भयावह हो जाएगी। दूसरी ओर ईरान ने अब अपने अंडरवाटर ड्रोन से हमलों की शुरुआत कर दी है जिससे खतरा कई गुना बढ़ गया है। ईरान के पास 'अजदार' नाम का एक पानी के नीचे चलने वाला ड्रोन है जो 200 किलो विस्फोटक के साथ 600 किलोमीटर की दूरी तक हमला करने में सक्षम है। इस ड्रोन के इस्तेमाल ने समुद्री सुरक्षा को और भी खतरे में डाल दिया है।
होर्मुज की नाकेबंदी और भविष्य की चुनौतियां
ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसकी सभी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं तब तक होर्मुज को बंद रखा जाएगा। ऐसी स्थिति में जो टैंकर रडार बंद करके वहां से निकलने की कोशिश करेंगे उन पर हमलों का खतरा बना रहेगा जिससे समुद्र में तेल फैलने की मात्रा और बढ़ सकती है। नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल व्यापार भी ठप है और उसके पास तेल स्टोर करने की क्षमता सीमित है। यदि स्टोरेज की क्षमता खत्म हो जाती है तो ईरान को मजबूरी में अपना तेल समुद्र में बहाना पड़ सकता है। अब तक होर्मुज से केवल समुद्री माइंस हटाना ही एक चुनौती थी लेकिन यदि कोई समझौता होता भी है तो समुद्र से इस विशाल तेल रिसाव की सफाई करना एक बहुत लंबी और कठिन प्रक्रिया होगी।
