उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने रविवार देर रात एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 2008 बैच की आईएएस अधिकारी किंजल सिंह का तबादला कर दिया है। उन्हें परिवहन आयुक्त के महत्वपूर्ण पद से हटाकर अब माध्यमिक शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया है और किंजल सिंह के स्थान पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लौटे 2010 बैच के आईएएस अधिकारी आशुतोष निरंजन को नया परिवहन आयुक्त नियुक्त किया गया है। प्रशासनिक हलकों में इस बदलाव को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मंत्री के साथ तालमेल की कमी और विभागीय टकराव
प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि किंजल सिंह को हटाए जाने का सबसे बड़ा कारण परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के साथ उनके तालमेल की कमी थी। सूत्रों के अनुसार, विभागीय कामकाज और महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर मंत्री और आयुक्त के बीच मतभेद उभर आए थे। किंजल सिंह ने 16 सितंबर 2025 को परिवहन आयुक्त का पदभार संभाला था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ओवरलोडिंग के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने ओवरलोडिंग रैकेट में शामिल होने के आरोपों में कई पीटीओ (परिवहन अधिकारी) और अन्य कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। बताया जा रहा है कि मंत्री के निर्देशों और आयुक्त के त्वरित एक्शन के बीच समन्वय न बन पाना इस टकराव का मुख्य कारण बना।
ओवरलोडिंग पर सख्ती और सस्पेंशन की कार्रवाई
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह लगातार विभाग में ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने का दावा करते रहे हैं। हालांकि, जब आयुक्त स्तर पर बिना किसी 'समन्वय' के बड़े पैमाने पर निलंबन की कार्रवाइयां की गईं, तो दोनों के बीच अनबन की खबरें सार्वजनिक होने लगीं। यह भी माना जा रहा है कि नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू होने से पहले किसी भी बड़े विवाद को टालने के उद्देश्य से शासन ने यह कदम उठाया है। माध्यमिक शिक्षा सचिव के पद को शासन में एक 'साइडलाइन' पोस्टिंग के रूप में देखा जा रहा है, जिससे किंजल सिंह के कद में कमी आने की चर्चाएं हैं।
कौन हैं आईएएस किंजल सिंह?
किंजल सिंह उत्तर प्रदेश कैडर की एक चर्चित और प्रभावशाली महिला आईएएस अधिकारी हैं। मूल रूप से बलिया जिले की रहने वाली किंजल सिंह ने राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों में जिलाधिकारी (DM) के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं।
योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
रविवार देर रात हुआ यह तबादला केवल किंजल सिंह तक सीमित नहीं था। योगी सरकार ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कुल 40 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं।
हालांकि कुछ सूत्र इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहे हैं, लेकिन किंजल सिंह का मात्र 7 महीने का छोटा कार्यकाल और मंत्री के साथ उनके कथित मतभेद इस तबादले को विशेष रूप से चर्चा का विषय बना रहे हैं।
