- भारत,
- 22-Jan-2026 06:13 PM IST
दुनिया की भू-राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक खलबली मचा दी है। यूरोपीय संघ ने अब अमेरिका जैसे पारंपरिक सहयोगियों को दरकिनार करते हुए भारत के साथ एक बड़ी रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी का ऐलान किया है और यह कदम न केवल भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति का प्रमाण है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व पर यूरोप के अटूट भरोसे को भी दर्शाता है।
अमेरिका से मोहभंग और भारत पर भरोसा
विश्व स्तर पर वेनेजुएला, यूक्रेन और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर डोनाल्ड ट्रंप के अड़ियल रुख ने यूरोपीय देशों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है और यूरोपीय संघ को अब लगता है कि अमेरिका एक भरोसेमंद साथी के रूप में अपनी पुरानी भूमिका से पीछे हट रहा है। ऐसे में, यूरोपीय संघ ने एक वैकल्पिक और स्थिर शक्ति के रूप में भारत की ओर हाथ बढ़ाया है और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं का मानना है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत एक ऐसी वैश्विक शक्ति बनकर उभरा है जो न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करता है, बल्कि वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में भी सक्षम है।सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में नया अध्याय
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कलास ने यूरोपीय संसद में एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और यूरोपीय संघ एक नई 'सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी' (Security and Defence Partnership) पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो गए हैं। यह समझौता केवल कागजी नहीं होगा, बल्कि इसमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियान और साइबर रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जमीनी सहयोग शामिल होगा। यह साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय दिग्गजों का जमावड़ा
भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस नई दोस्ती की झलक आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में देखने को मिलेगी और इस बार गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके ठीक बाद, 27 जनवरी को नई दिल्ली में 16वां भारत-EU शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन के दौरान दोनों पक्ष आधिकारिक तौर पर सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे, जो आने वाले दशकों के लिए द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करेगा।यूरोप के लिए भारत क्यों है अनिवार्य?
काजा कलास ने अपने संबोधन में भारत को यूरोप के लिए 'अनिवार्य' (Indispensable) बताया है। उन्होंने कहा कि यूरोप के आर्थिक लचीलेपन और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ एक शक्तिशाली नया एजेंडा लागू करना समय की मांग है। इस साझेदारी के तहत सूचना सुरक्षा समझौते पर भी बातचीत शुरू होगी, जिससे दोनों देशों के बीच खुफिया और गोपनीय जानकारी साझा करना आसान हो जाएगा और 2030 तक के लिए एक व्यापक रणनीतिक एजेंडा तैयार किया जा रहा है, जो व्यापार, तकनीक और रक्षा के क्षेत्र में भारत-यूरोप को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।Europe is ready to deliver on a powerful new agenda with India.
— Kaja Kallas (@kajakallas) January 21, 2026
Today, the EU agreed to move forward with the signature of a new Security and Defence Partnership.
It will expand our cooperation in areas such as maritime security, counterterrorism and cyber-defence.
I look… pic.twitter.com/3SQQRovTYb
