भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) लंबे समय से लंबित था, लेकिन अब दोनों देश इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं और अगले हफ्ते सोमवार (27 अप्रैल) को इस एग्रीमेंट पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह समझौता न केवल भारतीय कारोबार के लिए नए रास्ते खोलेगा, बल्कि छात्रों और युवाओं के लिए नौकरी के बड़े अवसर भी प्रदान करेगा।
एक तरफ जहां मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के कारण पूरी दुनिया परेशान है और तेल-गैस की सप्लाई ठप होने से महंगाई बढ़ रही है, वहीं भारत अपने व्यापारिक हितों को सुरक्षित करने में जुटा है। हाल ही में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के भारत दौरे और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की जर्मनी यात्रा के दौरान हुए समझौतों के बाद अब न्यूजीलैंड के साथ यह ट्रेड पैक्ट संपन्न होने जा रहा है और इससे पहले भारत यूरोपियन यूनियन के साथ मेगा डील कर चुका है और अमेरिका के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है।
आर्थिक सफलता और प्रधानमंत्री लक्सन की घोषणा
मार्च 2025 में न्यूजीलैंड और भारत ने व्यापक मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत शुरू करने की घोषणा की थी। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने रविवार को घोषणा की कि दोनों देश अगले सप्ताह इस बहुप्रतीक्षित समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। प्रधानमंत्री लक्सन ने इसे एक महत्वपूर्ण आर्थिक सफलता करार देते हुए कहा कि इससे न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारत के 140 करोड़ उपभोक्ताओं के विशाल बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता एक लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक और आर्थिक प्रतिबद्धता को पूरा करता है। हालांकि न्यूजीलैंड सरकार के कुछ सदस्यों ने इस पर नकारात्मक रुख अपनाया है, लेकिन वहां के विपक्षी दलों ने भारत के साथ इस समझौते का स्वागत किया है।
व्यापारिक आंकड़े और द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार
भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
प्रमुख उद्योग और कॉर्पोरेट उपस्थिति
न्यूजीलैंड भारत को ऊन, लोहा, इस्पात, एल्युमीनियम, फल, मेवे, लकड़ी का गूदा और पुनर्चक्रित कागज निर्यात करता है। वहीं, भारत से फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, बहुमूल्य धातुएं, पत्थर और टेक्सटाइल का निर्यात किया जाता है। न्यूजीलैंड में महिंद्रा मोटर्स, टेक महिंद्रा, टीसीएस, इंफोसिस, डॉ रेड्डी लेबोरेटरी और रॉयल एनफील्ड जैसी भारतीय कंपनियां सक्रिय हैं और दूसरी ओर, भारत में न्यूजीलैंड की हेमिल्टन जेट और वेलोसिटी जैसी कंपनियां कार्यरत हैं। विशेष रूप से, भारत के चंद्रयान-3 मिशन में न्यूजीलैंड की एक टेलीकम्युनिकेशन कंपनी द्वारा निर्मित चिप्स का उपयोग किया गया था।
समझौते से होने वाले संभावित लाभ
इस ट्रेड डील से दोनों देशों को व्यापक लाभ होने की उम्मीद है:
ऐतिहासिक रक्षा संबंध और प्रवासी समुदाय
भारत और न्यूजीलैंड के बीच रक्षा संबंध ऐतिहासिक हैं। 1915 में गैलीपोली अभियान और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एल अलामीन और कैसिनो की लड़ाइयों में दोनों देशों की सेनाओं ने साथ मिलकर संघर्ष किया था। वर्तमान में न्यूजीलैंड में लगभग 300,000 भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनमें डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंप्यूटर विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अलावा कई लोग किराना, खाद्य वितरण, दुग्ध उत्पादन और टैक्सी चालक के रूप में भी कार्यरत हैं। न्यूजीलैंड में हिंदी पांचवीं सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है और वहां दिवाली व होली जैसे त्योहार प्रमुखता से मनाए जाते हैं।
