ब्रिक्स समिट 2026 के बीच भारत और रूस के व्यापारिक रिश्तों को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त के महीने में रूस ने अपनी ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत का रुख किया। रिपोर्ट बताती है कि अगस्त में रूस द्वारा किए गए कुल तेल उत्पादों के आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 70 फीसदी रही है। यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि कभी भारत अपनी जरूरत का 2 फीसदी तेल भी रूस से नहीं लेता था, लेकिन साल 2022 के बाद भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 40 फीसदी के पार चली गई थी। अब समय का पहिया ऐसा घूमा है कि रूस को भारत से पेट्रोल और डीजल मंगवाना पड़ रहा है।
रूस को रिकॉर्ड पेट्रोल का निर्यात
सीआरईए की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने अगस्त में रिकॉर्ड 172000 टन पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात किया। इसमें भारत की ओर से की गई सप्लाई सबसे अहम रही। भारत ने अगस्त में रूस को 120000 टन पेट्रोल की सप्लाई की, जिसकी कुल कीमत लगभग 7 करोड़ 80 लाख यूरो रही। रूस द्वारा भारत से की गई फ्यूल इंपोर्ट की यह मात्रा पिछले महीने के रिकॉर्ड से सात गुना से भी ज्यादा थी। अगर इसकी तुलना पूरे साल 2025 से की जाए, तो यह उस दौरान किए गए कुल आयात से लगभग तीन गुना ज्यादा रही। रूस में ईंधन की यह कमी मुख्य रूप से यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर किए गए लगातार ड्रोन हमलों के कारण हुई है, जिससे रूस की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता पर बुरा असर पड़ा है।
वाडिनार रिफाइनरी और नायरा एनर्जी का कनेक्शन
रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि भारत से रूस भेजा गया यह पूरा पेट्रोल गुजरात के वाडिनार में स्थित रिफाइनरी में तैयार किया गया था। इस रिफाइनरी का संचालन नायरा एनर्जी द्वारा किया जाता है, जिसमें रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की 49 और 13 पॉइंट प्रतिशत की हिस्सेदारी है। सीआरईए के अनुसार, साल 2026 के पहले आठ महीनों में वाडिनार रिफाइनरी में इस्तेमाल किया गया पूरा कच्चा तेल रूस से ही आया था, जबकि साल 2025 में यह हिस्सेदारी 81 फीसदी थी। इसका सीधा मतलब यह है कि रूस अपना ही कच्चा तेल भारत की उस रिफाइनरी में भेज रहा है जहां उसकी हिस्सेदारी है, और वहां से तैयार पेट्रोल को वापस अपने देश मंगा रहा है क्योंकि वह घरेलू स्तर पर इसका उत्पादन नहीं कर पा रहा है।
किस रास्ते से रूस पहुंचा भारतीय ईंधन
वाडिनार रिफाइनरी से रूस भेजे गए पेट्रोल की खेप को पहुंचाने के लिए एक विशेष समुद्री मार्ग और प्रक्रिया का पालन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल की प्रत्येक खेप को मिस्र के तट के पास एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर किया गया, जिसे शिप-टू-शिप ट्रांसफर कहा जाता है। इसके बाद इस ईंधन को रूस के बेलोये मोरे बंदरगाह पर उतारा गया। सीआरईए ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि इन गतिविधियों में शामिल सभी जहाज प्रतिबंधित टैंकरों की श्रेणी में आते थे। ऐतिहासिक रूप से रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पाद निर्यातकों में शामिल रहा है, लेकिन अगस्त में उसके कुल तेल आयात में पेट्रोल की हिस्सेदारी 74 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि साल 2023 से 2025 के बीच यह औसत केवल 6 फीसदी ही था।
अन्य देशों से आयात और रूसी निर्यात में गिरावट
भारत के अलावा कुछ अन्य देशों ने भी अगस्त में रूस को तेल उत्पादों की आपूर्ति की है। दक्षिण कोरिया ने रूस को 18000 टन तेल उत्पादों की सप्लाई की, जिसमें ज्यादातर गैसऑयल शामिल था। वहीं, मिस्र ने रूस को लगभग 25000 टन डीजल का निर्यात किया, जिसकी कीमत 1 करोड़ 60 लाख यूरो आंकी गई है। दूसरी ओर, रूस से समुद्री मार्ग के जरिए होने वाले तेल उत्पादों के निर्यात में 21 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। रूस के बंदरगाहों पर तेल उत्पादों की लोडिंग लगातार तीसरे महीने घटी है और यह अगस्त 2025 के स्तर के आधे से भी कम रह गई है। विशेष रूप से तुप्से बंदरगाह, जो रूस का चौथा सबसे बड़ा निर्यात केंद्र था, वहां से पिछले तीन महीनों में एक भी खेप रवाना नहीं हुई है क्योंकि मई से वहां यूक्रेनी ड्रोन हमलों का असर बना हुआ है।
