मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक भीषण युद्ध की शक्ल लेता जा रहा है। बीते शनिवार को ईरान ने जॉर्डन स्थित मुवफ्फक साल्टी एयरबेस पर एक जोरदार हमला किया। इस हमले में 2 अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई है और कई अन्य सैनिक घायल हुए हैं। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस हमले के बाद से 1 सैनिक लापता बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है। ईरान ने इस हमले के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिससे एयरबेस को काफी नुकसान पहुंचा है।
मुवफ्फक साल्टी एयरबेस पर हमले का विवरण
ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने एयरबेस के सबसे संवेदनशील हिस्से को अपना निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि मिसाइलें सीधे उन जगहों पर जाकर गिरीं जहां अमेरिकी सैनिक सो रहे थे। ये रहने की जगहें कंटेनर से बनी हुई थीं। जिस समय ईरान ने ये मिसाइलें दागीं, अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने उन्हें हवा में ही नष्ट करने की पूरी कोशिश की और हालांकि, ईरान की एक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में कामयाब रही और सीधे कंटेनर से बने घरों से जा टकराई। इस सीधी टक्कर के कारण वहां मौजूद सैनिकों को संभलने का मौका नहीं मिला।
हताहतों की संख्या और बचाव कार्य
इस हमले के परिणामस्वरूप 2 अमेरिकी सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई। हमले की गंभीरता को देखते हुए घायल हुए सैनिकों में से 4 को तुरंत एयरलिफ्ट किया गया और इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। मुवफ्फक साल्टी एयरबेस सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां अमेरिकी सेना के साथ-साथ फाइटर जेट भी तैनात रहते हैं। 1 सैनिक के लापता होने की खबर ने अमेरिकी खेमे में चिंता और बढ़ा दी है।
अमेरिका की जवाबी कार्रवाई और पेंटागन का रुख
अपने सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने ईरान पर पलटवार करने की तैयारी तेज कर दी है। पेंटागन को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि ईरान द्वारा किए गए इस हमले का कड़ा जवाब दिया जाए। अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह अपने सैनिकों पर हुए इस हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और आने वाले समय में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज की जा सकती है।
कुवैत में साद अल-अब्दुल्ला एकेडमी पर हमला
ईरान की आक्रामकता केवल जॉर्डन तक ही सीमित नहीं रही। जॉर्डन के साथ-साथ ईरान ने कुवैत पर भी जोरदार हमला किया है। ईरान ने कुवैत की साद अल-अब्दुल्ला एकेडमी फॉर सिक्योरिटी साइंसेज को अपना निशाना बनाया। कुवैत में दो दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा हमला है और इससे पहले ईरान ने पानी को मीठा बनाने वाले यानी डिसैलिनेशन प्लांट पर भी हमला किया था। जानकारों का मानना है कि अगर डिसैलिनेशन प्लांट पर हमले जारी रहते हैं, तो यह खाड़ी देशों के लिए पानी का गंभीर संकट पैदा कर सकता है, जो बेहद खतरनाक स्थिति होगी।
हवाई क्षेत्र बंद और उड़ानों पर असर
मिसाइल हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए कुवैत ने शनिवार सुबह कुछ समय के लिए अपना पूरा हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर दिया था। इस सुरक्षा उपाय के कारण कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों के समय में बदलाव करना पड़ा, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ईरान के इन हमलों ने पूरे मिडिल-ईस्ट में युद्ध के बादलों को और गहरा कर दिया है।
