सोनम वांगचुक की पत्नी पहुंचीं दिल्ली हाई कोर्ट, सफदरजंग अस्पताल से प्राइवेट में शिफ्ट करने की मांग

सोनम वांगचुक के अनशन के 22वें दिन उनकी पत्नी गीतांजलि अगमो ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने सफदरजंग अस्पताल पर अविश्वास जताते हुए वांगचुक को किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने और मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की है।

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और उनकी हिरासत को लेकर कानूनी लड़ाई अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गई है और उनकी पत्नी गीतांजलि अगमो ने अदालत में याचिका दायर कर अपने पति को केंद्र सरकार के सफदरजंग अस्पताल से हटाकर किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की है। यह कदम तब उठाया गया है जब सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल आज 22वें दिन में प्रवेश कर गई है। गीतांजलि अगमो ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल के प्रशासन और वहां से दी जा रही मेडिकल रिपोर्ट पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। ज्ञात हो कि वांगचुक को 18 जुलाई को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अस्पताल पर अविश्वास और गंभीर आरोप

गीतांजलि अगमो ने दिल्ली हाई कोर्ट से अपनी याचिका पर आज ही सुनवाई करने का आग्रह किया है और उन्होंने अपनी दलील में कहा कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल की कार्यप्रणाली पर संदेह है। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रशासन सोनम वांगचुक के ब्लड टेस्ट और अन्य स्वास्थ्य जांचों के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी साझा कर रहा है। गीतांजलि ने यह भी दावा किया कि उनके पति को अस्पताल में अवैध तरीके से हिरासत में रखा गया है। परिवार का मानना है कि अनशन के इस नाजुक दौर में वांगचुक को जिस पारदर्शी चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है, वह उन्हें सरकारी अस्पताल में नहीं मिल पा रही है।

स्वास्थ्य बुलेटिन और वर्तमान स्थिति

सफदरजंग अस्पताल द्वारा हाल ही में सोनम वांगचुक का हेल्थ बुलेटिन जारी किया गया है। इस बुलेटिन के अनुसार, वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें कड़ी निगरानी में रखने की सलाह दी है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि उनके ब्लड पैरामीटर यानी रक्त के मानकों में बदलाव आए हैं, जो लगातार अनशन का परिणाम है और सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर थे, जिसके कारण उनकी सेहत में गिरावट आने लगी थी। कल यानी शनिवार को उनके अनशन का 21वां दिन था और आज यह 22वें दिन पर पहुंच गया है। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति पर बारीकी से नजर रखना अनिवार्य है।

सुरक्षा घेरा और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर सौरभ भारद्वाज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और गीतांजलि अगमो द्वारा बताए गए अपडेट साझा किए हैं। भारद्वाज ने कहा कि वांगचुक की पत्नी केंद्र सरकार के नियंत्रण वाले सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में वांगचुक की निगरानी के लिए 30 पुलिसकर्मियों का कड़ा पहरा लगाया गया है। गीतांजलि का आरोप है कि प्रशासन वांगचुक की बीमारी का झूठा बहाना बना रहा है ताकि उन्हें 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक होने वाले मार्च में शामिल होने से रोका जा सके। उनके अनुसार, यह सब उन्हें आंदोलन से दूर रखने की एक सोची-समझी रणनीति है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील

केंद्र सरकार और अस्पताल प्रशासन पर लग रहे इन गंभीर आरोपों के बीच सौरभ भारद्वाज ने जनता से एक विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह के हालात बन रहे हैं, वे अत्यंत गंभीर हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया है कि वे कल यानी 20 जुलाई को सुबह 9 बजे जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित हों। इस मार्च का उद्देश्य जंतर-मंतर से संसद तक अपनी बात पहुंचाना है और वांगचुक के समर्थकों और उनके परिवार का मानना है कि भारी पुलिस बल की तैनाती और अस्पताल में उनका प्रवास केवल उनके लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का एक प्रयास है।