सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए केंद्र सरकार को शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के साथ बातचीत शुरू करने की सलाह दी है। अन्ना हजारे ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से सरकार को आगाह किया कि उन्हें वांगचुक के सब्र की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि बातचीत करने में आखिर क्या हर्ज है और हजारे के अनुसार, सरकार को उनकी मांगों पर स्पष्ट रूप से हां या ना कहना चाहिए, लेकिन संवाद की प्रक्रिया को रोकना उचित नहीं है।
सोनम वांगचुक की मांगें और विरोध का कारण
सोनम वांगचुक वर्तमान में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। वांगचुक का मानना है कि पेपर लीक मामले ने देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है और उल्लेखनीय है कि अन्ना हजारे ने इस संदर्भ में अपने पुराने दिनों को याद किया, जब 2011 में लोकपाल कानून को लेकर दिल्ली में उनके अनशन ने तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की नींव हिला दी थी।
संवाद से समाधान की आवश्यकता
अन्ना हजारे ने जोर देकर कहा कि किसी भी समस्या का समाधान केवल बातचीत और आपसी सहमति से ही संभव है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं कई बार अनशन किए हैं, लेकिन उनका मानना है कि विवादों को सुलझाने के लिए संवाद और सौहार्दपूर्ण तरीका ही सबसे बेहतर है और हजारे ने कहा कि अगर समाज को एकजुट होकर आगे ले जाना है, तो विवादों को आपसी सहमति से हल करने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी मामले को बहुत अधिक खींचा जाता है, तो उसका समाधान निकलना और भी कठिन हो जाता है।
जंतर-मंतर पर कार्रवाई और अस्पताल में भर्ती
शनिवार को दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर एक सरकारी अस्पताल में भर्ती करा दिया। यह कार्रवाई उनके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन की गई, जब उनकी तबीयत बिगड़ने की खबरें आईं। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। विपक्षी दलों ने इस कदम को तानाशाही करार दिया है और मोदी सरकार पर लोकतंत्र तथा संविधान की मर्यादा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
विपक्ष का कड़ा रुख और लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए के अन्य दलों ने सरकार की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जंतर-मंतर से महिला पहलवानों को घसीटने से लेकर पूर्व सैनिकों के साथ किए गए व्यवहार तक, वर्तमान सरकार ने बार-बार लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का काम किया है और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने को पूरी तरह से गलत ठहराया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि असत्य और हिंसा मोदी सरकार के दो मुख्य सिद्धांत बन गए हैं। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि देश के छात्रों का मुद्दा उठाने वालों को कोई भी ताकत नहीं रोक सकती और अहिंसक भूख हड़ताल कर रहे व्यक्ति को इस तरह हटाना लोकतंत्र के खिलाफ है।
