मॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट और रिजिजू की चेतावनी

संसद के मॉनसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने टीएमसी के बागी गुट को बुलाए जाने पर विरोध जताते हुए वॉकआउट किया, जिस पर सरकार ने चर्चा की अपील की है।

संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले रविवार को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी गुट यानी एनसीपीआई को आमंत्रित किए जाने पर कड़ा विरोध जताया और बैठक से वॉकआउट कर दिया। बैठक समाप्त होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर सदन में हंगामा होगा तो चर्चा संभव नहीं हो पाएगी और संसद का न चलना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

रिजिजू ने दी हंगामे पर चेतावनी

किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि हंगामे से केवल राजनीतिक नुकसान ही होगा और उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के बजाय चर्चा में भाग लें। रिजिजू ने कहा कि सरकार चाहती है कि हर बिल पर विस्तार से चर्चा हो और उसके बाद ही उसे पारित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि देश चाहता है कि संसद सुचारू रूप से चले और इसकी गरिमा को कोई ठेस न पहुंचे। इस बैठक में कुल 40 दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। एनसीपीआई के मुद्दे पर रिजिजू ने बताया कि उनके 20 सांसद हैं जिन्होंने अलग बैठने की मांग की है, जो कि एक उचित मांग है और वर्तमान में स्पीकर के विचाराधीन है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन 20 सांसदों के अधिकारों को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है। सरकार ने बुलेटिन के माध्यम से 8 बिलों की सूची साझा की है और आश्वासन दिया है कि परिसीमन जैसे किसी भी अन्य विधेयक को लाने से पहले बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) में विपक्ष के साथ चर्चा की जाएगी।

विपक्ष के गंभीर आरोप और मुद्दे

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने बैठक के बाद सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार द्वारा लाए जा रहे विधेयकों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मुद्दे देश के सामने हैं। उन्होंने मांग की कि सदन में इन ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए और सरकार को जवाबदेह होना चाहिए। गोगोई ने विशेष रूप से अयोध्या में राम मंदिर को लेकर कथित चंदा चोरी का मुद्दा उठाया और इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सरकार को अपनी संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। विपक्ष ने मॉनसून सत्र के दौरान छात्रों के साथ हो रहे अन्याय, किसानों की समस्याओं, मणिपुर की स्थिति और एथेनॉल जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की बात कही है। गोगोई ने परिसीमन विधेयक पर भी सभी राज्यों और दलों से बातचीत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

एनसीपीआई और वॉकआउट का विवाद

बैठक में टीएमसी के बागी गुट के नेताओं सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष की उपस्थिति ने विवाद को जन्म दिया। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बताया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) सहित पूरे विपक्ष ने इसके विरोध में सांकेतिक वॉकआउट किया। मोइत्रा का तर्क था कि एनसीपीआई एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है और टेबल ऑफिस की सूची में टीएमसी के सदस्यों की संख्या 28 दिखाई गई है, जिसमें इन बागियों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इन 20 सांसदों के विलय को अभी तक स्पीकर ने मंजूरी नहीं दी है और अयोग्यता से जुड़ी 20 याचिकाएं अभी भी लंबित हैं। दूसरी ओर, सुदीप बंदोपाध्याय ने दावा किया कि वे एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी हैं और उन्होंने स्पीकर को सभी आवश्यक दस्तावेज सौंप दिए हैं।

अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं

जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने राम मंदिर के मुद्दे पर कहा कि यह सभी की भावनाओं से जुड़ा एक संवेदनशील विषय है और जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार की प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक करार दिया और उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। जेएमएम सांसद महुआ माजी ने वॉकआउट का समर्थन करते हुए कहा कि देश में राजनीतिक दलों को तोड़ने की साजिश रची जा रही है और कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने भी संविधान की रक्षा के लिए वॉकआउट को जरूरी बताया। हालांकि, लोकसभा सचिवालय की हालिया रिपोर्ट में इन 20 बागी सांसदों को अभी भी टीएमसी का हिस्सा माना गया है, लेकिन उनके लिए अलग बैठने की व्यवस्था की जानकारी दी गई है।