संसद के मानसून सत्र 2026 का एजेंडा बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में आधिकारिक रूप से तय कर लिया गया है। सोमवार से शुरू होने वाले इस सत्र से पहले रविवार को लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में यह महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून सत्र के दौरान आने वाले विभिन्न विधेयकों पर चर्चा के लिए समय का आवंटन करना और सदन के सुचारु संचालन की रूपरेखा तैयार करना था। लोकसभा अध्यक्ष ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने और रचनात्मक चर्चा में भाग लेने की अपील की है।
विधायी कार्य और समय का आवंटन
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में उन 6 विधेयकों पर विस्तार से चर्चा की गई जिन्हें इस सत्र के दौरान पेश किया जाना है। सरकार और विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित विधायी कार्यों पर अपने विचार साझा किए। सदस्यों ने राष्ट्रीय महत्व और जनहित के मुद्दों पर चर्चा कराने के सुझाव भी दिए। समिति ने इन सुझावों पर संज्ञान लेते हुए संसदीय परंपराओं के अनुरूप चर्चा का कार्यक्रम और समय तय किया है।
सत्र में पेश होने वाले 6 प्रमुख विधेयक
मानसून सत्र के दौरान निम्नलिखित विधेयकों पर चर्चा की जाएगी और उन्हें पारित करने के लिए रखा जाएगा:
- विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA संशोधन बिल): यह विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश में आने वाले विदेशी अनुदानों की पारदर्शिता को बढ़ाना है। इस महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा के लिए 4 घंटे का समय आवंटित किया गया है।
- आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026: वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं को देखते हुए यह विधेयक लाया जा रहा है। इसका लक्ष्य भारत के सॉवरन डेट मार्केट को मजबूत करना और वैश्विक पूंजी प्रवाह को आकर्षित करना है। इस पर 4 घंटे चर्चा होगी।
- उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026: इस विधेयक के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना है। इस पर भी 4 घंटे का समय तय किया गया है।
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026: यह कानून वर्ष 1969 के मूल अधिनियम की धारा 13(3) में बदलाव करेगा। इसमें 2023 में भी संशोधन किया गया था। नए बदलावों के बाद विलंबित जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियमों को अधिक कड़ा और व्यवस्थित बनाया जाएगा। इस विधेयक पर 4 घंटे चर्चा होगी।
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026: वर्ष 1971 के अधिनियम में संशोधन करने वाले इस विधेयक के जरिए राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय सम्मान को ठेस पहुँचाने वाले कृत्यों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधानों को और सख्त किया जाएगा। इसके लिए 4 घंटे का समय दिया गया है।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026: एमएसएमई क्षेत्र में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और भरोसा आधारित नियमों को बढ़ावा देने के लिए यह विधेयक पेश किया जाएगा। इसमें देरी से होने वाले भुगतानों के तंत्र को मजबूत करने और राज्यों को अधिक अधिकार देने का प्रावधान है। इस पर सबसे अधिक 5 घंटे चर्चा होगी।
विपक्ष का रुख और हंगामे की संभावना
सत्र के पहले दिन से ही सदन में भारी हंगामे के आसार नजर आ रहे हैं। सरकार राज्यसभा में वंदे मातरम् बिल लाने की तैयारी में है, जिसका विपक्ष ने विरोध करने का मन बना लिया है। इसके अलावा लोकसभा और राज्यसभा में नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दे, चंदा चोरी के आरोप, सोनम वांगचुक का मामला और टीएमसी सांसदों को अलग ग्रुप के तौर पर ट्रीट किए जाने जैसे विषयों पर टकराव हो सकता है। शिवसेना सांसदों के मर्जर को लेकर भी सदन में शोर-शराबा होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री का संबोधन और स्पीकर की अपील
संसदीय परंपरा के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्र के पहले दिन सुबह 10 बजे के करीब मीडिया को संबोधित करेंगे। इस दौरान वे विपक्ष से सदन की उपयोगिता सुनिश्चित करने और विधायी कार्यों में सहयोग करने का आग्रह कर सकते हैं। दूसरी ओर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि संसद का व्यवस्थित संचालन सभी दलों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी सांसद सहयोगात्मक भावना के साथ कार्य करेंगे और इस मानसून सत्र को जनहित में उत्पादक बनाएंगे।
