मध्य प्रदेश में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाया है। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ और मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) अधिनियम 2026 के मसौदे को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है। यह ऐतिहासिक बैठक राजधानी भोपाल के बाहरी इलाके में स्थित जगदीशपुर में आयोजित की गई थी। कैबिनेट के इस फैसले को राज्य में 'एक देश, एक कानून' के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
कैबिनेट की सर्वसम्मति और मुख्यमंत्री का संबोधन
जगदीशपुर में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान प्रस्तावित कानून के मसौदे पर सभी मंत्रियों ने अपनी सहमति जताई। कैबिनेट बैठक के समापन के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस निर्णय की औपचारिक घोषणा की और उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों ने प्रस्तावित कानून का पुरजोर समर्थन किया है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, "आज मध्य प्रदेश कैबिनेट ने पूरे दिल से और सर्वसम्मति से समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। मैं इस अवसर पर अपने सभी कैबिनेट सहयोगियों और प्रदेश की जनता को बधाई देता हूं।
मुख्यमंत्री ने आगे विस्तार से बताते हुए कहा कि समानता भारतीय सभ्यता का एक मूल और आधारभूत सिद्धांत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी दृष्टिकोण और विचारधारा को ध्यान में रखते हुए इस कानून का मसौदा तैयार किया गया है, ताकि राज्य के प्रत्येक नागरिक को एक समान कानूनी संरक्षण और अधिकार प्राप्त हो सकें।
विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश होगा विधेयक
कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद अब राज्य सरकार इस विधेयक को विधायी प्रक्रिया के अगले चरण में ले जाने के लिए तैयार है। मध्य प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है, और सरकार की योजना 20 जुलाई को इस यूसीसी विधेयक को सदन में पेश करने की है। विधानसभा में पेश किए जाने के बाद, इस विधेयक पर सदन के भीतर विस्तृत चर्चा और बहस की जाएगी। कानून का रूप लेने से पहले इसे विभिन्न विधायी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा, जिससे इसके सभी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श सुनिश्चित किया जा सके।
क्या है यूसीसी विधेयक और इसके उद्देश्य
समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक का मुख्य लक्ष्य नागरिक मामलों के लिए एक ऐसा कानूनी ढांचा तैयार करना है जो धर्म और समुदाय की सीमाओं से परे हो। इस प्रस्तावित कानून के दायरे में विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। वर्तमान व्यवस्था में इन विषयों के लिए अलग-अलग धार्मिक समुदायों के अपने व्यक्तिगत कानून (पर्सनल लॉ) प्रभावी हैं और यूसीसी अधिनियम 2026 का उद्देश्य इन विविध व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है। सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से नागरिक मामलों में एकरूपता आएगी और सभी समुदायों के लिए न्याय की प्रक्रिया अधिक सरल और समान हो जाएगी।
