इंडिया इंक में नेतृत्व का संकट: टाटा संस एचडीएफसी और गोदरेज के दिग्गजों ने क्यों छोड़ी कुर्सी

साल 2026 भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए बड़े बदलावों का साल रहा है। टाटा संस, एचडीएफसी बैंक और एयर इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियों के कप्तानों ने अपने पद छोड़ दिए हैं। इनमें से कई दिग्गज अब एआई सेक्टर की ओर रुख कर रहे हैं।

साल 2026 को भारतीय कॉर्पोरेट जगत के इतिहास में एक बड़े और व्यापक बदलाव के तौर पर याद किया जाएगा। इस वर्ष देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों के शीर्ष चेहरों ने बोर्डरूम से बाहर निकलने का निर्णय लिया है। टाटा संस, एचडीएफसी बैंक, गोदरेज और एयर इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियों में बड़े पैमाने पर नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इन दिग्गजों के इस्तीफे से न केवल पारंपरिक व्यवसायों में खलबली मची है, बल्कि तकनीकी जगत में भी हलचल काफी तेज हो गई है। मेटा और उबर जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों के बड़े अधिकारी भी अपने पुराने और सुरक्षित पदों को छोड़कर नई राहें चुन रहे हैं। इन सभी घटनाक्रमों से एक महत्वपूर्ण बात उभरकर सामने आई है कि बड़े अधिकारियों के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई एक नया और शक्तिशाली आकर्षण बन चुका है। इंडिया इंक इस समय बदलाव के एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां पुराने और अनुभवी दिग्गज नए नेतृत्व के लिए रास्ता खाली कर रहे हैं।

टाटा संस में एक नए युग की शुरुआत और चंद्रशेखरन की विदाई

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन लगभग एक दशक तक कंपनी की कमान संभालने के बाद अब अपना पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने अगस्त के महीने में ही बोर्ड को इस बात की जानकारी दे दी थी कि 20 फरवरी 2027 को उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे दोबारा इस पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं। साल 1987 में टीसीएस के साथ अपने करियर की शुरुआत करने वाले चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप में अपने जीवन के चार दशक बिताए हैं। उनका यह फैसला ऐसे समय में आया है जब टाटा ग्रुप एयर इंडिया के कायाकल्प के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। यह ग्रुप वर्तमान में तकनीक से लेकर स्टील तक कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए हुए है और चंद्रशेखरन का जाना समूह के लिए एक बड़े युग का अंत माना जा रहा है।

बैंकिंग सेक्टर में मची सबसे बड़ी हलचल और एचडीएफसी बैंक का संकट

बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी यह साल काफी उतार-चढ़ाव भरा साबित हुआ है और एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन ने घोषणा की है कि वे अपना तीसरा कार्यकाल नहीं लेंगे। उनका मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है। जगदीशन ने ही साल 2023 में एचडीएफसी बैंक के साथ एचडीएफसी लिमिटेड के ऐतिहासिक विलय का नेतृत्व किया था। हालांकि, जगदीशन के इस ऐलान से पहले ही बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने मार्च में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और उन्होंने इस्तीफे के समय कंपनी के काम करने के तरीके और नैतिकता पर गंभीर सवाल उठाए थे। इस अचानक हुए इस्तीफे के कारण बैंक की मार्केट वैल्यू में कुछ समय के लिए बड़ी गिरावट आई थी और हालांकि बाद में एक बाहरी समीक्षा ने उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया था, लेकिन इस घटना ने बैंक के भीतर की हलचल को उजागर कर दिया था।

विमान हादसे से लेकर शेयर बाजार में आई भारी गिरावट तक

एफएमसीजी सेक्टर की बात करें तो गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (जीसीपीएल) के एमडी और सीईओ सुधीर सीतापति ने 11 अगस्त को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला था क्योंकि शेयरधारकों ने कुछ ही दिन पहले उन्हें अगले 5 साल के लिए दोबारा चुना था। इस फैसले का बाजार पर तत्काल असर पड़ा और कंपनी के शेयर एक ही दिन में 11 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। दूसरी ओर, एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने भी अप्रैल 2026 में इस्तीफा दे दिया। उन्हें टाटा समूह ने साल 2022 में इस संकटग्रस्त एयरलाइन को सुधारने की जिम्मेदारी सौंपी थी। विल्सन के कार्यकाल के दौरान ही 500 से ज्यादा नए विमानों का ऑर्डर दिया गया था। हालांकि, जून 2025 में अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया बोइंग 787 के भयानक क्रैश ने उनके नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। इस दुखद हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी, जिसने एयरलाइन के प्रबंधन पर भारी दबाव बना दिया था।

दिग्गज अफसरों को खींच रहा एआई का नया तिलिस्म

कॉर्पोरेट जगत में हो रहे ये बदलाव सिर्फ पुरानी और पारंपरिक कंपनियों तक ही सीमित नहीं हैं। अब शीर्ष अधिकारियों का नया ठिकाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बन रहा है। मेटा इंडिया की वाइस प्रेसिडेंट संध्या देवनाथन ने 10 साल तक कंपनी में रहने के बाद इस्तीफा दे दिया है। वह अब सिंगापुर में ओपनएआई के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रही हैं। इसी तरह, उबर इंडिया के प्रेसिडेंट प्रभजीत सिंह भी अपना पद छोड़कर ओपनएआई के पहले इंडिया एमडी बन गए हैं। ई-कॉमर्स क्षेत्र में भी बड़े बदलाव देखे गए हैं, जहां मिंत्रा की सीईओ नंदिता सिन्हा ने चार साल बाद अपना पद छोड़ दिया है। उन्होंने 3 अगस्त को स्विगी इंस्टामार्ट के सीईओ के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली है। इन सभी बड़े बदलावों से यह स्पष्ट होता है कि भारत की शीर्ष कंपनियों के बोर्डरूम में इस समय भारी उथल-पुथल मची हुई है और दिग्गज अब भविष्य की तकनीक की ओर बढ़ रहे हैं।