ईरानी सेना के कमांडर ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ युद्ध विराम के दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को कई गुना बढ़ा लिया है। ईरान का यह दावा अमेरिका और इजरायल के लिए चिंता का विषय बन सकता है। ईरान की सरकारी प्रेस टीवी के अनुसार, आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर जनरल मुसावी ने जानकारी दी है कि संघर्षविराम के इस दौर में ईरान अपनी सैन्य शक्ति को युद्ध से पहले की तुलना में कहीं अधिक तीव्र गति से मजबूत कर रहा है।
मुख्य बिंदु: ईरान की सैन्य तैयारियों का विवरण
जनरल मुसावी के दावे और सैन्य अपग्रेडेशन
जनरल मुसावी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि संघर्षविराम की अवधि का उपयोग ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को अपग्रेड करने के लिए किया है। उन्होंने कहा कि नई आपूर्ति से भंडार को भरने का काम युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में बहुत तेजी से पूरा किया गया है। जनरल मुसावी के अनुसार, ईरान ने इस समय का लाभ उठाकर अपनी सैन्य कमजोरियों को दूर किया है और नए हथियारों का बड़े पैमाने पर भंडारण किया है।
दुश्मन की चुनौतियों पर ईरान का प्रहार
ईरानी कमांडर ने दुश्मन देशों, विशेषकर अमेरिका और इजरायल की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे अपने गोला-बारूद के स्टॉक को फिर से बनाने में काफी संघर्ष कर रहे हैं और मुसावी ने दावा किया कि दुश्मन को हथियारों की आपूर्ति के लिए धीरे-धीरे विदेश से आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे उन्हें समय और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच संघर्षविराम की स्थिति नाजुक बनी हुई है।
रणनीतिक तैयारी और भविष्य की चेतावनी
ईरान का दावा है कि उसकी मिसाइल और ड्रोन यूनिट्स अब पहले से कहीं अधिक सक्षम और तैयार हैं। जनरल मुसावी ने संकेत दिया कि यदि युद्ध फिर से शुरू होता है, तो ईरान दुश्मन को पहले से भी अधिक कड़ा और मजबूत जवाब देने की स्थिति में होगा। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की यह रणनीति न केवल होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की है, बल्कि अपनी मिसाइल और ड्रोन तकनीक को लगातार उन्नत कर क्षेत्र में अपनी सैन्य धाक जमाने की भी है।
