ईरान और इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है। सोमवार को ईरान ने इजराइल की ओर मिसाइलें दागकर हमले को और तेज कर दिया और इस हमले की सबसे उल्लेखनीय विशेषता मिसाइलों पर लिखा गया संदेश था। ईरानी सेना ने इन मिसाइलों पर स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज का वह बयान अंकित किया था, जिसमें उन्होंने युद्ध का विरोध किया था। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक कूटनीतिक संदेश देने के उद्देश्य से उठाया गया है। मिसाइल प्रक्षेपण के दौरान ईरानी सैनिकों द्वारा नारेबाजी भी की गई, जो क्षेत्र में बढ़ते तनाव को रेखांकित करती है।
स्पेनिश प्रधानमंत्री के बयान का कूटनीतिक उपयोग
ईरान द्वारा मिसाइलों पर स्पेनिश प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के शब्दों का उपयोग एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया है। हाल ही में सांचेज ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि स्पेन की आधिकारिक नीति 'युद्ध के खिलाफ' है और उन्होंने अमेरिका और इजराइल द्वारा किए जा रहे हमलों को 'गैरकानूनी' और 'खतरनाक' करार दिया था। ईरान ने इन्हीं शब्दों को अपनी मिसाइलों पर लिखकर यह प्रदर्शित करने का प्रयास किया है कि पश्चिमी देशों के भीतर भी इस सैन्य कार्रवाई को लेकर मतभेद हैं। सांचेज के बयानों को ईरान ने अपने पक्ष में एक नैतिक समर्थन के रूप में पेश किया है, जिससे युद्ध के मैदान में कूटनीतिक विमर्श को नई दिशा मिली है।
युद्धविराम के लिए ईरान की तीन नई शर्तें
लेबनानी मीडिया आउटलेट अल मयादीन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने युद्धविराम के लिए तीन नई और कड़ी शर्तें रखी हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार ही आगे बढ़ रहा है। पहली नई शर्त के तहत, ईरान ने मांग की है कि इस क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। दूसरी शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लिए नए और सख्त नियमों के निर्धारण से संबंधित है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। तीसरी शर्त में ईरान ने उन मीडिया कर्मियों और संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई और उनके प्रत्यर्पण की मांग की है, जिन्हें वह अपने देश के खिलाफ गतिविधियों में संलिप्त मानता है।
पूर्व की शर्तों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर ईरान का रुख
इन नई शर्तों से पहले भी ईरान ने युद्धविराम के लिए कुछ बुनियादी मांगें रखी थीं। इनमें भविष्य में दोबारा युद्ध न होने की लिखित गारंटी, युद्ध से हुए नुकसान का पूर्ण मुआवजा और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में चल रहे सैन्य अभियानों को समाप्त करना शामिल था। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक उनके विरोधियों को पर्याप्त सबक नहीं मिल जाता, तब तक उनकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। ईरान का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह केवल तात्कालिक शांति के बजाय क्षेत्र में एक नया सुरक्षा ढांचा स्थापित करना चाहता है, जिसमें पश्चिमी शक्तियों का प्रभाव न्यूनतम हो।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट की चेतावनी
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने इस संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभावों के प्रति सचेत किया है। कैनबरा में एक संबोधन के दौरान बिरोल ने कहा कि वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने इसकी तुलना एक साथ आने वाले कई तेल और गैस संकटों से की है। उनके अनुसार, यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो दुनिया का कोई भी देश इसके आर्थिक परिणामों से अछूता नहीं रहेगा। युद्ध के कारण कई महत्वपूर्ण तेल और गैस बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है और ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता पैदा हुई है।
कमोडिटी बाजार पर प्रभाव और सोने की कीमतों में गिरावट
वैश्विक तनाव के बीच वित्तीय बाजारों में भी भारी हलचल देखी जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है और 89 प्रति औंस के स्तर पर आ गई है। यह गिरावट पिछले नौ दिनों से निरंतर जारी है। पिछले सप्ताह सोने में 10% से अधिक की कमी देखी गई, जिसे पिछले 43 वर्षों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट माना जा रहा है। 82 प्रति औंस के अपने रिकॉर्ड स्तर पर था, जिससे अब यह 20% से अधिक नीचे आ चुका है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के कारण बढ़ती मुद्रास्फीति की आशंका और ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की उम्मीदों ने निवेशकों के व्यवहार को प्रभावित किया है।
IRAN SLAPS ‘THANK YOU SPAIN PM’ POSTER ON MISSILE BEFORE LAUNCHING IT AT ISRAEL pic.twitter.com/sgmh3iMF46
— RT (@RT_com) March 22, 2026
