इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान द्वारा पिछले 48 घंटों में किए गए चार बड़े हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। रविवार को डिमोना और अरद शहरों में मिसाइल हमलों से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान की हालिया गतिविधियां वैश्विक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। आधिकारिक बयानों के अनुसार, इन हमलों में नागरिक बुनियादी ढांचे, धार्मिक स्थलों और रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि दुनिया इस खतरे को पहचाने और इसके खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करे।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने दौरे के दौरान उन स्थानों का निरीक्षण किया जहां ईरानी मिसाइलें गिरी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने जानबूझकर उन क्षेत्रों को चुना जहां आम नागरिक निवास करते हैं। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में तनाव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, रक्षा प्रणालियों ने कई खतरों को विफल किया, लेकिन हमलों की व्यापकता ईरान के आक्रामक रुख को दर्शाती है।
नागरिक क्षेत्रों और प्रतिबंधित हथियारों का उपयोग
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान ने पिछले 48 घंटों में नागरिक आबादी को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है। उन्होंने बताया कि मिसाइलें बच्चों के डे-केयर सेंटर और बुजुर्गों के आवासों के पास गिरीं और प्रधानमंत्री के अनुसार, ईरान ने इन हमलों में क्लस्टर बम जैसे प्रतिबंधित हथियारों का उपयोग किया है, जो व्यापक तबाही मचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों पर इस तरह के हथियारों का उपयोग युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
यरुशलम के पवित्र स्थलों पर मंडराता खतरा
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में एक गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने यरुशलम के पास स्थित अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थलों को खतरे में डाल दिया है। उनके अनुसार, मिसाइलें उन क्षेत्रों के करीब गिरीं जहां चर्च ऑफ द होली सेपल्चर, अल-अक्सा मस्जिद और वेस्टर्न वॉल स्थित हैं। ये स्थल ईसाई, मुस्लिम और यहूदी धर्मों के लिए वैश्विक महत्व रखते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान की कार्रवाई यह दर्शाती है कि उसे दुनिया की धार्मिक भावनाओं और ऐतिहासिक विरासतों की कोई परवाह नहीं है।
डिमोना परमाणु केंद्र और अंतरराष्ट्रीय सैन्य ठिकानों पर हमले
इजराइली वायु सेना और होम फ्रंट कमांड वर्तमान में डिमोना में हुए हमले की विस्तृत जांच कर रहे हैं। डिमोना शहर नेगेव रेगिस्तान में स्थित है और यह शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर के निकट होने के कारण सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान ने लगभग 4000km दूर स्थित डिएगो गार्सिया में अमेरिका और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की मिसाइल क्षमता अब यूरोप तक पहुंचने में सक्षम है, जो एक वैश्विक सुरक्षा संकट है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी और तेल ब्लैकमेल
आर्थिक मोर्चे पर, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरान पर 'ऑयल ब्लैकमेल' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बाधित कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उनके अनुसार, यह कदम केवल इजराइल के खिलाफ नहीं बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने का एक प्रयास है। उन्होंने विश्व के नेताओं से अपील की कि वे ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान की इस आर्थिक आक्रामकता का मुकाबला करें।
वैश्विक सुरक्षा के लिए एकजुटता का आह्वान
नेतन्याहू ने अमेरिकी नेतृत्व और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि इजराइल की यह लड़ाई केवल अपनी रक्षा के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक सभ्यता की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने सवाल किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और कितनी देर तक ईरान की इन गतिविधियों को मूकदर्शक बनकर देखता रहेगा। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अब केवल निंदा करने का समय बीत चुका है और ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ठोस सैन्य और कूटनीतिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
