वैश्विक अर्थव्यवस्था पर युद्ध का साया: महंगाई और मंदी का दोहरा खतरा

मार्च के ग्लोबल बिजनेस सर्वे मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में एक साथ कमजोरी का संकेत दे रहे हैं। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों में उछाल आया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ गया है।

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए मार्च का महीना चुनौतीपूर्ण रहने के संकेत मिल रहे हैं। नवीनतम ग्लोबल बिजनेस सर्वे के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों ही प्रमुख क्षेत्रों में एक साथ गिरावट देखने को मिल सकती है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यह गिरावट अमेरिका से लेकर यूरो जोन तक फैली हुई है, जो युद्ध के कारण हुए आर्थिक नुकसान की पहली स्पष्ट झलक पेश करती है। ब्लूमबर्ग द्वारा जुटाए गए परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स (PMI) के अनुमानों में व्यापक कमी की उम्मीद जताई गई है।

केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों में बदलाव

क्षेत्रीय शिपिंग और उत्पादन में आई रुकावटों के कारण ऊर्जा की कीमतों में अचानक तेजी आई है। इस स्थिति ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, यूके ने अपनी मौद्रिक नीति में ढील देने की योजनाओं को फिलहाल टाल दिया है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के नीति निर्माताओं ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला किया है और यूरो जोन के बैंकों ने नीति को सख्त करने का रुख अपनाया है। फेडरल रिजर्व ने भी संकेत दिया है कि उधार लेने की लागत में कटौती की संभावना अभी दूर है, जिसके बाद निवेशकों ने ब्याज दरों में कमी की उम्मीदें कम कर दी हैं।

अमेरिका और कनाडा का आर्थिक परिदृश्य

अमेरिका में आर्थिक आंकड़ों की आवक सीमित रहने की संभावना है, जिसमें एसएंडपी ग्लोबल का मार्च महीने का शुरुआती मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई डेटा महत्वपूर्ण होगा। मिशिगन यूनिवर्सिटी द्वारा जारी किए जाने वाले कंज्यूमर सेंटीमेंट इंडेक्स से यह स्पष्ट होगा कि गैस की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकी उपभोक्ताओं के विश्वास को कितना प्रभावित किया है। फेडरल रिजर्व के अधिकारी वर्तमान में ईरान युद्ध से होने वाले आर्थिक असर की निगरानी कर रहे हैं। कनाडा में, बैंक ऑफ कनाडा की सीनियर डिप्टी गवर्नर कैरोलिन रोजर्स आर्थिक आउटलुक और वित्तीय प्रणाली को आकार देने वाले कारकों पर चर्चा करेंगी, जिसमें टैरिफ से प्रभावित क्षेत्रों के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

एशिया में महंगाई और व्यापारिक चुनौतियां

एशियाई बाजारों में इस हफ्ते महंगाई के आंकड़ों पर विशेष नजर रहेगी। जापान में फरवरी के दौरान उपभोक्ता कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी होने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण यूटिलिटी सब्सिडी और खाद्य कीमतों में स्थिरता है। हालांकि, ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी इस राहत को कम कर सकती है। ऑस्ट्रेलिया में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े ऊंचे स्तर पर बने रहने का अनुमान है, जो मई में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी का आधार बन सकते हैं। 75% पर स्थिर रख सकता है।

यूरोप और लैटिन अमेरिका की आर्थिक स्थिति

यूरोप में ब्रिटेन के महंगाई के आंकड़े और बैंक ऑफ इंग्लैंड के अधिकारियों के बयान बाजार की दिशा तय करेंगे। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा 30 अप्रैल को ब्याज दरों पर फैसला लिए जाने की संभावना है। हंगरी और नॉर्वे के केंद्रीय बैंक भी अपनी उधार लागतों को स्थिर रखने या उनमें बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं। लैटिन अमेरिका में, ब्राजील का सेंट्रल बैंक अपनी पिछली कटौती के बाद सावधानी बरत रहा है। चिली और मेक्सिको में भी युद्ध के कारण ईंधन आयात की लागत बढ़ने से ब्याज दरों में कटौती की योजनाओं पर असर पड़ा है। अर्जेंटीना में जीडीपी संबंधी आंकड़े दक्षिण अमेरिकी अर्थव्यवस्था में जारी सुस्ती की पुष्टि कर सकते हैं।