सऊदी अरब का ईरान पर कड़ा एक्शन, दूतावास कर्मियों को निकाला

सऊदी अरब ने ईरानी दूतावास के सैन्य अटैची और चार अन्य कर्मियों को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' घोषित कर 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया है। यह कदम खाड़ी क्षेत्र में ईरान के बढ़ते हमलों और संप्रभुता के उल्लंघन के विरोध में उठाया गया है।

रियाद: इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के 23वें दिन सऊदी अरब ने तेहरान के खिलाफ एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। सऊदी अरब सरकार ने ईरानी दूतावास के कई वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' (अवांछित व्यक्ति) घोषित कर दिया है। आधिकारिक आदेश के अनुसार, इन अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। यह निर्णय खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और सऊदी अरब की क्षेत्रीय संप्रभुता पर उत्पन्न खतरों के मद्देनजर लिया गया है।

सऊदी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक आदेश

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ईरान के सैन्य अटैची, उनके सहायक और दूतावास के तीन अन्य स्टाफ सदस्यों को तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इन अधिकारियों की गतिविधियां राजनयिक मानदंडों के प्रतिकूल पाई गई हैं। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी प्रशासन ने इस कार्रवाई की सूचना ईरानी दूतावास को दे दी है और निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्थान सुनिश्चित करने को कहा है।

अंतरराष्ट्रीय संधियों और संप्रभुता का उल्लंघन

सऊदी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में ईरान की हालिया कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है और मंत्रालय के अनुसार, ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में किए जा रहे हमले 'बीजिंग समझौते', संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 और अच्छे पड़ोसी के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। सऊदी अरब ने कहा कि तेहरान की ये गतिविधियां न केवल राज्य की संप्रभुता का अपमान हैं, बल्कि इस्लामी भाईचारे के उन मूल्यों को भी चोट पहुँचाती हैं जिन पर द्विपक्षीय संबंधों की नींव रखी गई थी।

यानबू बंदरगाह पर हमला और सुरक्षा चिंताएं

इस कूटनीतिक कार्रवाई के पीछे हाल ही में सऊदी अरब के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र, यानबू बंदरगाह पर हुआ ड्रोन हमला एक मुख्य कारण माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ईरान समर्थित समूहों द्वारा किए गए इन हमलों ने सऊदी अरब की ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाया है। सऊदी अरब ने चेतावनी दी है कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी आवश्यक कदम को उठाने में संकोच नहीं करेगा। यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में चल रहे व्यापक संघर्ष को और अधिक जटिल बना रहा है, जहाँ ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच तनाव चरम पर है।

क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया और कतर का उदाहरण

सऊदी अरब से पहले कतर ने भी ईरान के खिलाफ इसी तरह का कड़ा रुख अपनाया था। 18-19 मार्च को कतर ने ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अटैची को निष्कासित कर दिया था। कतर का यह फैसला रास लफ्फान गैस सुविधा पर हुए बड़े हमले के बाद आया था, जिसे कतर ने अपनी संप्रभुता का 'खतरनाक उल्लंघन' करार दिया था। अब सऊदी अरब द्वारा उठाए गए इस कदम से खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के बीच ईरान की क्षेत्रीय नीतियों को लेकर बढ़ती नाराजगी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।

राजनयिक संबंधों पर संभावित प्रभाव

सऊदी अरब और ईरान के बीच 2023 में चीन की मध्यस्थता से हुए 'बीजिंग समझौते' के बाद संबंधों में सुधार की उम्मीद जगी थी। हालांकि, हालिया सैन्य तनाव और दूतावास कर्मियों के निष्कासन ने इस समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सऊदी विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि ईरान की आक्रामकता द्विपक्षीय संबंधों की स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। वर्तमान में, होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी देशों में स्थित सैन्य ठिकानों पर बढ़ते हमलों ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रख दिया है।