ईरान: 70 लाख नागरिक अमेरिकी आक्रमण के खिलाफ लड़ने को तैयार, कालीबाफ का दावा

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने दावा किया है कि लगभग 70 लाख ईरानी नागरिक किसी भी अमेरिकी जमीनी आक्रमण के खिलाफ हथियार उठाने के लिए तैयार हैं। यह बयान ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य गतिविधियों के बीच आया है।

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि देश के लगभग 70 लाख नागरिक किसी भी संभावित अमेरिकी जमीनी आक्रमण का मुकाबला करने के लिए हथियार उठाने को तैयार हैं। कालीबाफ के अनुसार, यह लामबंदी पिछले एक सप्ताह के भीतर हुए एक राष्ट्रव्यापी अभियान का परिणाम है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव अपने चरम पर है। अधिकारियों के अनुसार, ईरानी नागरिकों ने स्वेच्छा से देश की रक्षा के लिए अपनी तत्परता व्यक्त की है।

ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच पिछले एक महीने से अधिक समय से संघर्ष की स्थिति बनी हुई है और दोनों पक्षों की ओर से लगातार हवाई हमले और जवाबी कार्रवाइयां की जा रही हैं। कालीबाफ, जो युद्ध की शुरुआत से ही सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे हैं, ने इस दावे को सार्वजनिक कर अमेरिका को सीधे तौर पर चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की जनता अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

कालीबाफ का सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान

संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस लामबंदी की जानकारी साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि एक हफ्ते से भी कम समय में पूरे ईरान में एक व्यापक अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान लगभग 70 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया और कहा कि वे विदेशी आक्रमण की स्थिति में हथियार उठाकर अपने देश की सीमाओं की रक्षा करेंगे। कालीबाफ इस स्तर के दावे को सार्वजनिक करने वाले ईरान के पहले उच्च पदस्थ संवैधानिक अधिकारी बन गए हैं।

सैन्य लामबंदी और नागरिक भागीदारी का स्वरूप

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान केवल नियमित सैन्य बलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भारी भागीदारी देखी गई है। कालीबाफ ने संकेत दिया कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी किसी भी प्रकार की जमीनी कार्रवाई की कोशिश करते हैं, तो उन्हें केवल ईरानी सेना का ही नहीं, बल्कि एक विशाल नागरिक प्रतिरोध का भी सामना करना पड़ेगा। रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता का प्रदर्शन करना और संभावित हमलावरों को मनोवैज्ञानिक संदेश देना है।

ईरान और अमेरिका के बीच गहराता तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच संबंध पिछले कुछ समय से अत्यंत तनावपूर्ण रहे हैं। हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से क्षेत्रीय संघर्षों में अमेरिकी हस्तक्षेप और इजरायल को दिए जा रहे समर्थन ने इस तनाव को और हवा दी है। कालीबाफ का यह बयान डोनाल्ड ट्रंप के आगामी कार्यकाल और उनकी संभावित विदेश नीति को लेकर जारी चर्चाओं के बीच आया है। ईरानी नेतृत्व ने बार-बार कहा है कि वे किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उनकी सैन्य क्षमताएं पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा और जमीनी आक्रमण की आशंकाएं

मध्य पूर्व में जारी मौजूदा संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। कालीबाफ के बयान को क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है और उन्होंने जोर देकर कहा कि यह लड़ाई केवल सरकार या सेना की नहीं है, बल्कि यह पूरे ईरानी राष्ट्र की सुरक्षा का विषय है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान द्वारा इस तरह की नागरिक लामबंदी का दावा करना उसकी 'असममित युद्ध' (Asymmetric Warfare) की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जहां नागरिक आबादी को रक्षा तंत्र में शामिल किया जाता है।

कूटनीतिक और सैन्य परिदृश्य की स्थिति

वर्तमान में ईरान और उसके विरोधियों के बीच कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद नजर आ रहे हैं। कालीबाफ ने अपने संबोधन में यह भी संकेत दिया कि ईरान अपनी रक्षात्मक नीतियों में कोई समझौता नहीं करेगा। जमीनी आक्रमण की स्थिति में 70 लाख लोगों के तैयार होने का दावा ईरान की आंतरिक एकजुटता को प्रदर्शित करने का एक प्रयास है। अधिकारियों के मुताबिक, देश भर में सैन्य प्रशिक्षण और नागरिक सुरक्षा अभ्यासों को भी तेज कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।