ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के सबसे ऊंचे और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बी1 पुल को नष्ट किए जाने के बाद, तेहरान ने जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। ईरान की अर्ध-सरकारी फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने मध्य पूर्व क्षेत्र के आठ प्रमुख पुलों की एक 'हिट लिस्ट' प्रकाशित की है। इस सूची को अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों के खिलाफ 'जैसे को तैसा' की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह सूची उन संभावित ठिकानों को दर्शाती है जिन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) निशाना बना सकता है।
ईरान द्वारा लक्षित आठ प्रमुख पुलों का विवरण
अनादोलू की रिपोर्ट और ईरानी मीडिया आउटलेट्स के अनुसार, इस हिट लिस्ट में खाड़ी देशों और जॉर्डन के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे शामिल हैं। सूची में कुवैत का शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह समुद्री पुल शामिल है, जो दुनिया के सबसे लंबे समुद्री पुलों में से एक है और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के तीन प्रमुख पुलों - शेख जायद पुल, अल मक़ता पुल और शेख खलीफ़ा पुल को भी इस सूची में रखा गया है। इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब को बहरीन से जोड़ने वाला रणनीतिक किंग फहद कॉज़वे भी ईरान के निशाने पर है। जॉर्डन के तीन महत्वपूर्ण पुलों - किंग हुसैन पुल, दामिया पुल और अब्दौन पुल को भी इस सूची में शामिल किया गया है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
बी1 पुल पर हमला और जान-माल का नुकसान
गुरुवार को अमेरिकी और इजरायली बलों द्वारा किए गए हवाई हमलों में ईरान का निर्माणाधीन बी1 पुल आंशिक रूप से ध्वस्त हो गया। यह पुल 136 मीटर की ऊंचाई के साथ मध्य पूर्व का सबसे ऊंचा पुल माना जा रहा था। अल्बोरज़ प्रांत के उप राज्यपाल घोद्रतोल्लाह सैफ के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस हमले में 8 लोगों की मृत्यु हुई है और 95 अन्य घायल हुए हैं। यह पुल तेहरान को पश्चिमी शहर कराज से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा था और ईरानी बुनियादी ढांचे के विकास का एक प्रमुख हिस्सा था और सोशल मीडिया पर प्रसारित फुटेज में पुल के बड़े हिस्सों को गिरते हुए और क्षेत्र में भारी धुएं का गुबार देखा गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आधिकारिक चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद एक वीडियो संदेश जारी कर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने तेहरान से 35 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित बी1 पुल के विनाश की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान का सबसे बड़ा पुल अब उपयोग के लायक नहीं रहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि यदि ईरान पांच सप्ताह से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत की मेज पर नहीं आता है, तो उसे और भी अधिक तबाही का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह हमला ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने की रणनीति का हिस्सा है और आने वाले समय में सैन्य कार्रवाई और तेज की जा सकती है।
ईरानी विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने एक आधिकारिक बयान में कहा कि अधूरे पुलों और नागरिक संपत्तियों को निशाना बनाना ईरानी जनता के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकता। अराघची के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई दुश्मन की हताशा और युद्ध के मैदान में उनकी विफलता को दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी हमले का उचित समय पर जवाब दिया जाएगा। ईरानी नेतृत्व ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर संकट
ईरान द्वारा जारी की गई हिट लिस्ट ने खाड़ी देशों में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। किंग फहद कॉज़वे और शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह जैसे पुल न केवल परिवहन के साधन हैं, बल्कि वे इन देशों की अर्थव्यवस्था और रसद आपूर्ति की जीवनरेखा भी हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन पुलों को निशाना बनाया जाता है, तो इससे पूरे मध्य पूर्व में व्यापार और आवाजाही पूरी तरह ठप हो सकती है। वर्तमान में, खाड़ी देशों ने अपने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की सुरक्षा बढ़ा दी है और स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव अब सीधे तौर पर क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बनता जा रहा है।
