ईरान का दावा: मरकजी प्रांत में अमेरिकी F-35 विमान मार गिराया

ईरान की सेना ने मरकजी प्रांत में एक अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा किया है। खातिम अल-अंबिया मुख्यालय के अनुसार, मलबे पर ब्रिटेन के लेकनहीथ एयर बेस के निशान मिले हैं। यह 15 दिनों के भीतर ईरान द्वारा किया गया दूसरा ऐसा दावा है।

ईरान की सेना ने मध्य ईरान के मरकजी प्रांत में एक अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराने का आधिकारिक दावा किया है। ईरान के खातिम अल-अंबिया मुख्यालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यह घटना क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच हुई है। अल-जजीरा की रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने विमान के मलबे की जांच की है, जिसमें कथित तौर पर ब्रिटेन स्थित लेकनहीथ एयर बेस (Lakenheath Air Base) के विशिष्ट निशान और पहचान चिह्न पाए गए हैं। यह एयरबेस अमेरिकी वायुसेना के लिए यूरोप और मध्य पूर्व के ऑपरेशनों में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र माना जाता है।

मरकजी प्रांत में विमान गिरने की घटना का विवरण

ईरानी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, मरकजी प्रांत के हवाई क्षेत्र में एक अज्ञात विमान की पहचान की गई थी, जिसे बाद में रक्षा प्रणालियों द्वारा निशाना बनाया गया। खातिम अल-अंबिया मुख्यालय ने पुष्टि की है कि विमान के मलबे को बरामद कर लिया गया है और उसकी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली गई है। मेहर न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, विमान के गिरने के बाद हुए जोरदार धमाके के कारण पायलट के सुरक्षित निकलने (Eject) की संभावना कम जताई गई है। हालांकि, अभी तक पायलट की स्थिति या मिशन के विशिष्ट उद्देश्यों के बारे में कोई आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया गया है।

ब्रिटेन के लेकनहीथ एयर बेस से जुड़ाव और साक्ष्य

ईरान द्वारा जारी किए गए साक्ष्यों में विमान के उन हिस्सों को दिखाया गया है जिन पर लेकनहीथ एयर बेस के कोड और लोगो अंकित हैं। रॉयल एयर फोर्स (RAF) लेकनहीथ, जो सफ़ोक, इंग्लैंड में स्थित है, अमेरिकी वायुसेना के 48वें फाइटर विंग का घर है। यह विंग उन्नत F-35A लाइटनिंग II विमानों का संचालन करती है। ईरानी दावों के अनुसार, मलबे पर मौजूद ये निशान इस बात की पुष्टि करते हैं कि विमान अमेरिकी बेड़े का हिस्सा था। ईरान ने इस बार मलबे की कई तस्वीरें और वीडियो जारी किए हैं ताकि अपने दावों को पुख्ता किया जा सके, क्योंकि इससे पहले के दावों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेह की दृष्टि से देखा गया था।

19 मार्च की पिछली घटना और ईरान के दावे

यह घटना पिछले 15 दिनों में ईरान द्वारा किया गया दूसरा बड़ा दावा है। इससे पहले 19 मार्च को भी ईरान ने एक अमेरिकी F-35A फाइटर जेट को मार गिराने की बात कही थी। उस समय ईरान ने एक वीडियो भी जारी किया था जिसमें विमान पर हमला होते दिखाया गया था। हालांकि, उस घटना के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने विमान के क्रैश होने की पुष्टि नहीं की थी। कुछ स्वतंत्र रिपोर्टों में कहा गया था कि विमान को नुकसान जरूर हुआ था और पायलट को मामूली चोटें आई थीं, लेकिन वह विमान को मध्य पूर्व में स्थित एक अमेरिकी एयर बेस पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराने में सफल रहा था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड की प्रतिक्रिया और सैन्य गतिरोध

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने वर्तमान घटना और ईरान के दावों पर तुरंत कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, पूर्व में आईजीआरसी (IRGC) के इसी तरह के दावों को अमेरिकी अधिकारियों ने गलत और दुष्प्रचार करार दिया था। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि उनके सभी विमानों का हिसाब रखा गया है और किसी भी लड़ाकू विमान के लापता होने की सूचना नहीं है। दोनों देशों के बीच इस तरह के दावों और प्रति-दावों ने क्षेत्र में पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

F-35 लड़ाकू विमान की तकनीकी क्षमताएं और सामरिक महत्व

F-35 लाइटनिंग II दुनिया के सबसे उन्नत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में से एक है, जिसे लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित किया गया है। यह विमान अपनी स्टील्थ तकनीक (रडार से बचने की क्षमता), उन्नत सेंसर और एकीकृत एवियोनिक्स के लिए जाना जाता है। एक F-35 विमान की लागत करोड़ों डॉलर में होती है और इसे मार गिराना किसी भी रक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। ईरान द्वारा इस विमान को निशाना बनाने का दावा न केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि यह क्षेत्र में अमेरिकी हवाई प्रभुत्व को चुनौती देने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।