ईरान: दुश्मन द्वीप पर कब्जे की कर रहे तैयारी, ग़ालिबफ की चेतावनी

ईरान की संसद के स्पीकर मुहम्मद बाग़ैर ग़ालिबफ ने दावा किया है कि दुश्मन देश एक क्षेत्रीय शक्ति की मदद से ईरानी द्वीप पर कब्जे की योजना बना रहे हैं। उन्होंने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस बीच, अमेरिका ने मध्य पूर्व में 2003 के बाद अपनी सबसे बड़ी सैन्य तैनाती शुरू कर दी है।

ईरान की संसद के स्पीकर मुहम्मद बाग़ैर ग़ालिबफ ने अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच एक गंभीर दावा किया है। ग़ालिबफ के अनुसार, खुफिया रिपोर्टों से संकेत मिले हैं कि दुश्मन देश ईरान के एक रणनीतिक द्वीप पर कब्जा करने की योजना बना रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां अपने चरम पर हैं और अमेरिका ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के आदेश दिए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने भी इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने मुख्य सैन्य और राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहा है।

ईरान के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तेहरान अपनी सीमाओं और क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है और स्पीकर ग़ालिबफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि दुश्मन की किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस योजना में एक क्षेत्रीय देश की संलिप्तता के प्रमाण मिले हैं, जिसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इस बीच, पेंटागन द्वारा मध्य पूर्व में हजारों अतिरिक्त सैनिकों और मरीन इकाइयों को भेजने के फैसले ने क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है।

खुफिया रिपोर्ट और द्वीप पर कब्जे का दावा

मुहम्मद बाग़ैर ग़ालिबफ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उन्हें प्राप्त खुफिया जानकारी के अनुसार, ईरान के दुश्मन एक क्षेत्रीय देश की सहायता से ईरानी क्षेत्र के एक द्वीप पर सैन्य नियंत्रण स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने उस विशिष्ट द्वीप या क्षेत्रीय देश का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उनके बयान ने सुरक्षा हलकों में हलचल पैदा कर दी है। ग़ालिबफ ने जोर देकर कहा कि ईरान की खुफिया एजेंसियां और सशस्त्र बल दुश्मनों की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर रख रहे हैं।

ईरानी संसद के स्पीकर ने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान किसी भी प्रकार के क्षेत्रीय अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं करेगा और उन्होंने कहा कि दुश्मन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जमीन पर भी सक्रियता दिखा रहे हैं। ईरान के अनुसार, इस तरह की किसी भी कोशिश का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता को भंग करना और ईरान की संप्रभुता को चुनौती देना है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ईरान की रक्षात्मक रणनीति अब किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ सक्रिय प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार है।

क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे पर हमले की चेतावनी

ग़ालिबफ ने अपने संदेश में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान के किसी भी हिस्से पर कब्जा करने या हमला करने का प्रयास किया गया, तो इसका जवाब केवल रक्षात्मक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर दुश्मन ने कोई कदम उठाया, तो उस क्षेत्रीय देश के सभी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर लगातार और बिना रुके हमले किए जाएंगे जो इस साजिश में शामिल है। यह चेतावनी उन देशों के लिए एक सीधा संदेश मानी जा रही है जो अमेरिका या इजरायल के साथ सैन्य सहयोग कर रहे हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने भी इस रुख का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन और त्वरित सैन्य जीत हासिल करना था, जिसमें वह पूरी तरह नाकाम रहा है। अरगची के अनुसार, अमेरिका की दबाव की राजनीति और सैन्य धमकियां तेहरान के संकल्प को कमजोर करने में विफल रही हैं। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोगियों के माध्यम से ईरान को घेरने की कोशिशें सफल नहीं होंगी और ईरान अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

अमेरिका की ऐतिहासिक सैन्य तैनाती

पेंटागन ने हाल ही में उत्तरी कैरोलिना स्थित अपने बेस से अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 2000 अतिरिक्त सैनिकों को मध्य पूर्व भेजने का आदेश जारी किया है। इसके अतिरिक्त, प्रशांत महासागर के दोनों ओर से दो मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट्स (MEUs) भी क्षेत्र की ओर रवाना हो रही हैं। इसमें जापान से ट्रिपोली एंफीबियस रेडी ग्रुप और सैन डिएगो से बॉक्सर एंफीबियस रेडी ग्रुप शामिल हैं और इन नई तैनातियों के साथ, मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या में 6,000 से 7,000 मरीन और नाविकों की वृद्धि होगी, जिससे वहां पहले से मौजूद 50,000 सैनिकों की संख्या और बढ़ जाएगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह तैनाती 2003 के इराक युद्ध के बाद से अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी है। उस समय अमेरिका ने लगभग 1,60,000 सैनिक भेजे थे। हालांकि वर्तमान में किसी जमीनी युद्ध का औपचारिक आदेश नहीं दिया गया है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों और युद्धपोतों की मौजूदगी एक बड़े सैन्य अभियान की तैयारी की ओर संकेत करती है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह तैनाती क्षेत्र में अपने सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए की गई है।

मध्य पूर्व में सुरक्षा परिदृश्य और संभावित रणनीतियां

सैन्य विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की इस भारी तैनाती के पीछे तीन संभावित रणनीतिक परिदृश्य हो सकते हैं। पहला परिदृश्य ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जा करना या उसका पूर्ण घेराव करना है, जो ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है और दूसरा परिदृश्य ईरान के तटवर्ती क्षेत्रों को सुरक्षित करके हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए फिर से पूरी तरह खोलना हो सकता है, जहां अक्सर तनाव की स्थिति बनी रहती है।

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण परिदृश्य ईरान की परमाणु सामग्री और संबंधित ठिकानों को सुरक्षित करना माना जा रहा है। हालांकि अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर इनमें से किसी भी उद्देश्य की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सैनिकों की प्रकृति और उनके पास मौजूद उपकरणों से इन संभावनाओं को बल मिलता है। ईरान ने इन गतिविधियों को उकसावे की कार्रवाई करार दिया है और कहा है कि वह अपनी सीमाओं के भीतर किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। क्षेत्र में बढ़ती सैन्य उपस्थिति ने कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को कम कर दिया है और तनाव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।