वैश्विक रक्षा परिदृश्य में मिसाइल तकनीक और उत्पादन की होड़ में रूस ने अपनी बादशाहत बरकरार रखी है। अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रूस वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा मिसाइल निर्माता देश बनकर उभरा है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व में मिसाइलों के व्यापक उपयोग के बीच यह तथ्य सामने आया है कि रूस की उत्पादन क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता अमेरिका और चीन जैसे शक्तिशाली देशों से अधिक है और रूस के पास न केवल सबसे बड़ा अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) बेड़ा है, बल्कि वह हाइपरसोनिक तकनीक के मामले में भी अग्रणी स्थान पर है।
रूस की इस सैन्य शक्ति का आधार उसका विशाल परमाणु भंडार और अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियां हैं। आधिकारिक आंकड़ों और रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, रूस के पास परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम 5,500 से अधिक मिसाइलें मौजूद हैं। इस भंडार में सामरिक युद्धक्षेत्र प्रणालियों से लेकर लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें शामिल हैं। भारत का प्रमुख रक्षा सहयोगी होने के नाते, रूस की यह तकनीकी बढ़त वैश्विक सुरक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उनकी मिसाइल प्रणालियां किसी भी आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदने में सक्षम हैं।
रूस की घातक मिसाइल प्रणालियां और उनकी क्षमताएं
रूस के मिसाइल बेड़े में सबसे प्रमुख नाम 'सरमत' का है, जिसे पश्चिमी देशों में 'साटन-2' के नाम से जाना जाता है। यह एक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक मार करने की क्षमता रखती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी गति और कम समय में लक्ष्य को भेदने की क्षमता है, जिससे इसे किसी भी मौजूदा मिसाइल डिफेंस सिस्टम द्वारा रोकना लगभग असंभव हो जाता है और इसके अतिरिक्त, रूस ने 'किंझल' नामक हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित की है, जिसे विमान से लॉन्च किया जा सकता है। यह 2,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक सटीक निशाना लगा सकती है और इसकी अत्यधिक गति इसे अभेद्य बनाती है।
रूस की तकनीकी प्रगति यहीं समाप्त नहीं होती। 'एवनगार्ड' मिसाइल प्रणाली रूस की नई पीढ़ी का हथियार है, जिसकी रफ्तार 25,000 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई है। यह मिसाइल अपनी अत्यधिक गति के कारण दुश्मन के रडार और रक्षा प्रणालियों को चकमा देने में सक्षम है। इसके अलावा, रूस ने समुद्र के भीतर निशाना लगाने वाली गुप्त मिसाइल प्रणालियों पर भी काम किया है, जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कई मौकों पर दावा किया है कि रूस की क्रूज मिसाइलें असीमित दूरी तक मार कर सकती हैं और वे रणनीतिक रूप से दुनिया में अद्वितीय हैं।
अमेरिका का मिसाइल भंडार और रक्षा स्थिति
मिसाइल निर्माण की वैश्विक सूची में अमेरिका दूसरे स्थान पर आता है। हालांकि अमेरिका को दुनिया की सबसे उन्नत मिसाइलों का निर्माता माना जाता है, लेकिन संख्या के मामले में वह रूस से पीछे है। अमेरिका के पास वर्तमान में लगभग 3,000 मिसाइलों का भंडार है, जिसमें पेट्रियॉट मिसाइल सिस्टम, टॉमाहॉक क्रूज मिसाइल और मिनटमैन-III ICBM जैसे शक्तिशाली हथियार शामिल हैं। कुछ रक्षा रिपोर्टों में यह भी अनुमान लगाया गया है कि अमेरिका अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर इस संख्या को 5,000 तक ले जाने की योजना पर काम कर रहा है।
अमेरिकी मिसाइल तकनीक मुख्य रूप से सटीकता और रक्षात्मक प्रणालियों पर केंद्रित है। पेट्रियॉट मिसाइल सिस्टम को दुनिया के सबसे प्रभावी रक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता है, जिसका उपयोग कई मित्र देश अपनी सुरक्षा के लिए करते हैं। टॉमाहॉक क्रूज मिसाइलें अपनी लंबी दूरी और सटीक मारक क्षमता के लिए जानी जाती हैं, जिनका उपयोग अमेरिका ने विभिन्न वैश्विक संघर्षों में किया है। इसके बावजूद, हाइपरसोनिक मिसाइलों के क्षेत्र में अमेरिका वर्तमान में रूस और चीन के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है और अपनी तकनीक को और अधिक उन्नत बनाने के प्रयासों में जुटा है।
चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति और मिसाइल कार्यक्रम
रूस और अमेरिका के बाद चीन दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मिसाइल निर्माता देश है और चीन ने पिछले कुछ दशकों में अपने मिसाइल कार्यक्रम में भारी निवेश किया है, जिससे वह एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी बन गया है। चीन की डीएफ (डोंगफेंग) श्रृंखला की मिसाइलें, विशेष रूप से डीएफ-21 और डीएफ-26, उसकी सैन्य शक्ति का मुख्य आधार हैं। डीएफ-21 को 'कैरियर किलर' के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह समुद्र में चलते हुए युद्धपोतों को निशाना बनाने में सक्षम है।
चीन ने हाइपरसोनिक तकनीक में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है और उसकी डीएफ-17 हाइपरसोनिक मिसाइल को वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों द्वारा एक बड़ी चुनौती माना जाता है। चीन का मिसाइल भंडार न केवल संख्या में बढ़ रहा है, बल्कि वह अपनी मारक क्षमता और पहुंच का भी विस्तार कर रहा है। दक्षिण चीन सागर और प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए चीन लगातार नई मिसाइल प्रणालियों का परीक्षण और तैनाती कर रहा है और चीन की यह बढ़ती क्षमता उसे दुनिया के सबसे बड़े मिसाइल भंडार वाले देशों की श्रेणी में मजबूती से खड़ा करती है।
भारत और अन्य देशों की वैश्विक भूमिका
मिसाइल निर्माण के क्षेत्र में भारत, फ्रांस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। भारत ने अपनी स्वदेशी मिसाइल तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत की अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें, विशेष रूप से अग्नि-V, अंतरमहाद्वीपीय मारक क्षमता प्रदान करती हैं और इसके अलावा, रूस के सहयोग से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल को दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल माना जाता है। भारत का आकाश मिसाइल सिस्टम भी रक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो कम दूरी की हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
