क्या कागजी शेर है इस्लामिक नाटो? हूती हमलों के बीच सऊदी अरब अकेला, पाकिस्तान और तुर्की की चुप्पी पर सवाल

मक्का समझौते के बावजूद हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच सऊदी अरब को पाकिस्तान और तुर्की से सैन्य मदद नहीं मिली है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अब युद्ध में कूदने के संकेत दिए हैं, जबकि सऊदी में पहले से ही 8000 पाकिस्तानी जवान तैनात हैं।

इस्लामिक नाटो के नाम से चर्चित गठबंधन की सार्थकता पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सऊदी अरब पिछले कुछ समय से हूती विद्रोहियों के भीषण हमलों का सामना कर रहा है, लेकिन उसके प्रमुख सहयोगी देश पाकिस्तान और तुर्की अब तक किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष सैन्य सहायता देने में विफल रहे हैं और मक्का समझौते के प्रावधानों के अनुसार, यदि इस गठबंधन के किसी भी एक देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाना चाहिए। इसके बावजूद, सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के लगातार जारी हमलों के बीच पाकिस्तान और तुर्की की ओर से कोई ठोस सैन्य कार्रवाई नहीं देखी गई है, जिससे इस गठबंधन की मजबूती पर संशय पैदा हो गया है।

हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब में भारी नुकसान

पिछले एक सप्ताह से सऊदी अरब हूती विद्रोहियों के निशाने पर है और उसे काफी नुकसान उठाना पड़ा है। मंगलवार, 8 सितंबर को हूती विद्रोहियों ने एक बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब के 4 शहरों पर एक साथ हमला बोल दिया। इस भीषण हमले में सऊदी अरब के 73 लोग घायल हो गए हैं। हमलों का असर केवल जान-माल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सऊदी अरब के महत्वपूर्ण तेल व्यापार को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। जिस स्थान से प्रतिदिन 4 लाख बैरल तेल का निर्यात किया जाता था, वहां हमले के कारण कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। इस आर्थिक और सुरक्षा संकट के बावजूद, पाकिस्तान और तुर्की की ओर से अब तक कोई सक्रिय सहयोग नहीं मिला है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बड़ा बयान

सहयोग को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। ख्वाजा आसिफ के मुताबिक, सऊदी अरब को बचाने के लिए पाकिस्तान मध्य पूर्व की इस जंग में कूद सकता है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि यदि सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले इसी तरह जारी रहते हैं, तो पाकिस्तान युद्ध में उतरने का फैसला ले सकता है। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब पर हो रहे इन हमलों के कारण अब मक्का समझौता सक्रिय हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान की सेना अलर्ट पर है और मक्का समझौते के तहत सऊदी अरब की मदद करना पाकिस्तान की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस जिम्मेदारी को निभाने में किसी को भी कोई शक नहीं होना चाहिए।

क्या है मक्का समझौता और इस्लामिक नाटो?

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने हाल ही में मक्का समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे दुनिया भर में इस्लामिक नाटो के रूप में देखा जा रहा है और इस समझौते की मुख्य शर्त यह है कि यदि इन तीनों में से किसी भी एक देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और तीनों मिलकर उसका मुकाबला करेंगे। यह समझौता पूरी तरह से नाटो की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसके तहत शामिल होने वाले देश अपना रक्षा बजट और खुफिया जानकारी एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। समझौते में संयुक्त रक्षा अभ्यास का भी प्रावधान है और भविष्य में दुनिया के अन्य मुस्लिम देशों तक इसके विस्तार की योजना भी बनाई गई है।

सऊदी में तैनात पाकिस्तानी सैनिक और परमाणु सुरक्षा का वादा

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के 8000 जवान पहले से ही वहां तैनात हैं। हालांकि, हूती विद्रोहियों के हमलों के बावजूद पाकिस्तान ने अभी तक इन जवानों को युद्ध में उतारने का कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है, जिसके कारण ये जवान फिलहाल खामोश बैठे हैं। पाकिस्तान ने इन जवानों को इसी साल सऊदी अरब की रक्षा के लिए भेजा था। समझौते के मुताबिक, पाकिस्तान जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों की रक्षा के लिए 80000 जवानों तक की तैनाती कर सकता है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने इन सहयोगी देशों को परमाणु सुरक्षा प्रदान करने का भी वादा किया है, जो इस गठबंधन को सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाता है।