इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है और इजराइल अब इस जंग में काफी हद तक अकेला पड़ता नजर आ रहा है। अमेरिका, जो इजराइल का सबसे बड़ा सहयोगी माना जाता है, उसने भी अब इजराइल से दूरी बनानी शुरू कर दी है। हाल ही में जब इजराइल ने ईरान पर हमला किया, तो अमेरिका ने सीधे तौर पर यह स्पष्ट कर दिया कि यह पूरी तरह से तेल अवीव की अपनी लड़ाई है। अमेरिका के इस रुख ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल की स्थिति को कमजोर कर दिया है।
ट्रंप ने नेतन्याहू को दी कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच के संबंध अब काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। ट्रंप ने नेतन्याहू को बहुत ही साफ और कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि उन्हें यह लड़ाई तुरंत बंद कर देनी चाहिए। ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि अगर इजराइल ने युद्ध नहीं रोका, तो वह पूरी दुनिया में अकेला पड़ जाएगा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच के मतभेद अब इतने गहरे हो गए हैं कि उन्हें पाटना मुश्किल लग रहा है। ट्रंप का यह रुख इजराइल के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
100 दिन बाद बदला मिडिल ईस्ट का समीकरण
ईरान के साथ युद्ध की शुरुआत में इजराइल को अमेरिका, बहरीन और यूएई जैसे प्रभावशाली देशों का भरपूर समर्थन मिल रहा था। लेकिन युद्ध के 100 दिन बीत जाने के बाद हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। मिडिल ईस्ट के देशों ने अब इजराइल से दूरी बनानी शुरू कर दी है। सोमवार 8 जून को ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू को फिर से चेतावनी दी कि इजराइल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह अलग-थलग पड़ सकता है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि इस जंग में कोई भी उनका साथ नहीं देगा, इसलिए उन्हें समझौते का इंतजार करना चाहिए और ईरान पर हमले रोक देने चाहिए।
इजराइल के अलग-थलग पड़ने के मुख्य कारण
इजराइल के इस तरह अलग-थलग पड़ने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए जा रहे हैं। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान जंग को लेकर अमेरिका और इजराइल के लक्ष्यों में बड़ा अंतर आ गया है और अमेरिका चाहता है कि यह पूरा मामला केवल परमाणु मुद्दे तक ही सीमित रहे और वह इसी को केंद्र में रखकर समझौता करना चाहता है। दूसरी ओर, इजराइल का लक्ष्य ईरान को पूरी तरह से खत्म करना और उसके सभी प्रॉक्सी संगठनों को नेस्तनाबूद करना है। इजराइल फिलहाल जंग खत्म करने के मूड में नहीं दिख रहा है। इसके अलावा, अमेरिका को खाड़ी के अन्य देशों जैसे यूएई, सऊदी अरब और कतर के साथ अपने संबंधों की भी चिंता है, जो इस क्षेत्र में किसी भी तरह का युद्ध नहीं चाहते हैं।
भरोसे की कमी और व्यक्तिगत मतभेद
राजनयिक स्तर पर भरोसे की कमी भी एक बड़ी वजह बनकर उभरी है। इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर दावा किया था कि जंग के दौरान नेतन्याहू यूएई गए थे और वहां के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। हालांकि, यूएई ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इस घटना के बाद यूएई ने इजराइल से फिलहाल दूरी बना ली है। वहीं, सीएनएन से बात करते हुए इजराइल के शीर्ष राजनयिक एलोन पिंकस ने कहा कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच मतभेद बहुत गहरे हैं। पिंकस के मुताबिक, ट्रंप जिस तरह से सार्वजनिक रूप से नेतन्याहू को नीचा दिखा रहे हैं, उससे साफ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति अब इजराइली प्रधानमंत्री को पसंद नहीं करते हैं।
ट्रंप की नेतन्याहू पर तल्ख टिप्पणियां
पिछले कुछ समय में ट्रंप ने नेतन्याहू पर कई तल्ख टिप्पणियां की हैं। पिछले हफ्ते एक फोन कॉल के दौरान ट्रंप ने लेबनान पर इजराइल के हमले को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया था। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि नेतन्याहू उनकी वजह से ही जेल जाने से बचे हैं और वह इतनी जल्दी एहसान भूल गए। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि वह जो भी कहेंगे, नेतन्याहू को उसे मानना ही पड़ेगा क्योंकि उनके पास और कोई विकल्प नहीं है। दूसरी तरफ, जब सीएनबीसी के इंटरव्यू में नेतन्याहू से ट्रंप के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने चुप्पी साधे रखी और कोई जवाब नहीं दिया।
