कर्नाटक की राजनीति के एक प्रमुख स्तंभ और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से अपने संन्यास की आधिकारिक घोषणा कर दी है। कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे आगामी 2028 के विधानसभा चुनाव में एक उम्मीदवार के रूप में हिस्सा नहीं लेंगे। सिद्धारमैया ने यह महत्वपूर्ण बयान मांड्या जिले के केआरपेटे में आयोजित केआरपेटे कृष्ण जयंती कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने अपने इस बड़े फैसले के पीछे अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया है।
समर्थकों की मांग और सिद्धारमैया का अडिग फैसला
मांड्या में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जैसे ही सिद्धारमैया ने अपने संन्यास की बात कही, वहां मौजूद उनके प्रशंसकों और समर्थकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। समर्थकों ने उनसे भावुक अपील करते हुए मांग की कि उन्हें अभी राजनीति नहीं छोड़नी चाहिए और कम से कम अगले 10 वर्षों तक सक्रिय राजनीति में बने रहना चाहिए। हालांकि, प्रशंसकों के इस भारी दबाव और मांग के बावजूद सिद्धारमैया ने अपने बयान को दोहराया और उन्होंने संकेत दिया कि शारीरिक स्वास्थ्य और उम्र के इस पड़ाव पर चुनावी राजनीति की सक्रियता को जारी रखना उनके लिए संभव नहीं होगा।
कर्नाटक की राजनीति में सिद्धारमैया का ऐतिहासिक सफर
सिद्धारमैया का राजनीतिक करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं। कुल मिलाकर वे 8 वर्षों से अधिक समय तक मुख्यमंत्री के पद पर आसीन रहे, जिससे वे कर्नाटक के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं। उनके पहले कार्यकाल की शुरुआत 13 मई 2013 को हुई थी और उन्होंने 15 मई 2018 तक सफलतापूर्वक अपने 5 वर्ष पूरे किए थे। उनका दूसरा कार्यकाल 20 मई 2023 से शुरू होकर 3 जून 2026 तक चला। वे अब तक कुल 9 बार विधायक के रूप में निर्वाचित हो चुके हैं, जो उनकी जनता के बीच गहरी पैठ को दर्शाता है।
हालिया राजनीतिक बदलाव और इस्तीफा
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक की सत्ता में बड़ा बदलाव हुआ है और बता दें कि कुछ दिन पहले ही सिद्धारमैया ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है। उनके पद छोड़ने के बाद डीके शिवकुमार को कर्नाटक का नया मुख्यमंत्री बनाया गया है और इस नेतृत्व परिवर्तन के बाद अब सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से भी दूरी बनाने का मन बना लिया है।
पहले भी दे चुके हैं संन्यास के संकेत
दिलचस्प बात यह है कि सिद्धारमैया ने पहले भी कई बार चुनावी राजनीति छोड़ने की बात कही है। जब वे 2013 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने मीडिया से कहा था कि यह उनका आखिरी चुनाव होगा। इसके बाद, 2018 के विधानसभा चुनाव में चामुंडेश्वरी और बादामी विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने से पहले भी उन्होंने इसी बात को दोहराया था कि 2018 का चुनाव उनका आखिरी चुनाव होगा। हालांकि, वे राजनीति में सक्रिय रहे और दोबारा मुख्यमंत्री भी बने।
उम्र और स्वास्थ्य का हवाला
अप्रैल 2024 में मैसूर में एक संबोधन के दौरान सिद्धारमैया ने अपनी भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की थी। उन्होंने कहा था कि वर्तमान में उनकी उम्र 77 वर्ष है। उन्होंने गणना करते हुए बताया था कि इस कार्यकाल के समाप्त होने तक वे 81 या 82 वर्ष के हो जाएंगे। उन्होंने चिंता जताई थी कि उस उम्र में उनका स्वास्थ्य शायद उनका साथ न दे और वे पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ काम न कर पाएं। इसी कारण को आधार बनाते हुए उन्होंने अब आधिकारिक तौर पर 2028 के विधानसभा चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है।
