ईरान पर इजरायल-अमेरिका का इतना बड़ा हमला क्यों? व्हाइट हाउस के अधिकारी ने किया खुलासा

इजरायल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए भीषण हवाई हमला किया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान पिछले हमलों में नष्ट हुए अपने परमाणु केंद्रों और सेंट्रीफ्यूज तकनीक को दोबारा विकसित कर रहा था, जिसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना गया।

शनिवार दोपहर को इजरायल और अमेरिका ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर एक व्यापक हवाई हमला किया। इस संयुक्त सैन्य अभियान में इजरायल के लगभग 200 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया, जिसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा हवाई हमला बताया जा रहा है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस हमले के पीछे के कारणों का खुलासा करते हुए बताया कि खुफिया एजेंसियों को ईरान की परमाणु गतिविधियों में तेजी आने के पुख्ता संकेत मिले थे। अधिकारी के अनुसार, ईरान उन बुनियादी ढांचों को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा था जिन्हें पिछले हमलों में नष्ट कर दिया गया था। यह कार्रवाई ईरान और पश्चिमी देशों के बीच चल रहे लंबे तनाव के बीच हुई है, जहां परमाणु कार्यक्रम हमेशा से विवाद का मुख्य केंद्र रहा है।

परमाणु बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण

अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खुफिया रिपोर्टों से यह स्पष्ट हुआ था कि ईरान अपने परमाणु केंद्रों की मरम्मत और पुनर्निर्माण में सक्रिय रूप से लगा हुआ है। अधिकारी के अनुसार, पिछले साल किए गए हमलों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े जिन महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुँचाया गया था, उन्हें तेहरान फिर से सक्रिय कर रहा था। व्हाइट हाउस का दावा है कि ईरान ने इन केंद्रों पर निर्माण कार्य तेज कर दिया था, जिससे यह अंदेशा बढ़ गया था कि वह जल्द ही परमाणु क्षमता हासिल करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा सकता है। इस पुनर्निर्माण कार्य को रोकने के लिए ही शनिवार को यह सैन्य कार्रवाई की गई।

सेंट्रीफ्यूज तकनीक और यूरेनियम संवर्धन

खुफिया रिपोर्टों में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि ईरान ने उच्च गुणवत्ता वाले सेंट्रीफ्यूज (Centrifuges) को स्वदेशी रूप से विकसित करने की क्षमता हासिल कर ली है और सेंट्रीफ्यूज वे उपकरण होते हैं जिनका उपयोग यूरेनियम को समृद्ध (Enrich) करने के लिए किया जाता है। अधिकारी के मुताबिक, ईरान द्वारा विकसित की गई यह नई तकनीक उसे बहुत कम समय में उच्च स्तर का संवर्धित यूरेनियम तैयार करने में सक्षम बनाती है और परमाणु हथियार बनाने के लिए अत्यधिक परिष्कृत यूरेनियम की आवश्यकता होती है, और ईरान की इस बढ़ती तकनीकी क्षमता को वाशिंगटन और यरूशलेम ने एक गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में देखा।

खुफिया रिपोर्ट और अमेरिकी चिंताएं

अमेरिकी अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर यह निर्णय लिया गया। रिपोर्टों में संकेत दिया गया था कि ईरान की गतिविधियां केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक सीमित नहीं थीं। हालांकि ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा उत्पादन और चिकित्सा अनुसंधान जैसे नागरिक उद्देश्यों के लिए है, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि बुनियादी ढांचे का विस्तार सैन्य उद्देश्यों की ओर इशारा कर रहा था। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि ईरान की बढ़ती तकनीकी शक्ति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती थी, जिसके कारण सैन्य हस्तक्षेप आवश्यक हो गया।

सैन्य अभियान का पैमाना और भागीदारी

इस हमले में इजरायली वायुसेना के 200 से अधिक लड़ाकू विमानों ने भाग लिया, जिसमें एफ-35 जैसे आधुनिक स्टील्थ विमान भी शामिल थे। इजरायली रक्षा बलों (IDF) के अनुसार, इस ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता को पंगु बनाना और उसके परमाणु विकास की गति को धीमा करना था। अमेरिकी सेना ने इस अभियान में रसद और खुफिया जानकारी साझा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हमले के दौरान ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों, मिसाइल उत्पादन केंद्रों और परमाणु अनुसंधान प्रयोगशालाओं को निशाना बनाया गया।

ईरान का पक्ष और क्षेत्रीय स्थिति

ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। ईरानी अधिकारियों ने दोहराया है कि उनका परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है और यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण है। तेहरान ने यह भी कहा है कि वह इस हमले का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। इस घटना के बाद मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुँच गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है। अधिकारी के अनुसार, इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखना था।