ईरान ने कुवैती तेल टैंकर अल-साल्मी को बनाया निशाना, दुबई में बड़ा हमला

कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) के अनुसार, ईरानी सेना ने दुबई पोर्ट के पास खड़े कुवैती क्रूड कैरियर 'अल-साल्मी' पर हमला किया। इस हमले में जहाज के बाहरी हिस्से को नुकसान पहुंचा और आग लग गई। इससे पहले कुवैत के डीसैलिनेशन प्लांट पर हुए हमले में एक भारतीय की मौत हुई थी।

कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर जानकारी दी कि ईरानी सेना ने संयुक्त अरब अमीरात के दुबई पोर्ट के एंकरेज एरिया में खड़े कुवैती क्रूड कैरियर 'अल-साल्मी' पर सीधा हमला किया है। यह घटना मंगलवार सुबह की बताई जा रही है, जब जहाज अपनी निर्धारित स्थिति पर खड़ा था और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच इस हमले ने समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अधिकारियों के अनुसार, हमले के समय टैंकर तेल से पूरी तरह भरा हुआ था, जिससे क्षेत्र में बड़े पर्यावरणीय संकट का खतरा उत्पन्न हो गया है।

पश्चिम एशिया में ईरान और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने स्पष्ट किया कि यह हमला उस समय हुआ जब क्षेत्र में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। इस हमले से पहले भी कुवैत के बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संघर्ष का दायरा अब तेल परिवहन और नागरिक सुविधाओं तक फैल गया है।

अल-साल्मी टैंकर पर हमले का विस्तृत घटनाक्रम

कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) के अनुसार, कुवैती क्रूड कैरियर 'अल-साल्मी' पर हमला मंगलवार, 31 मार्च को देर रात करीब 12:10 बजे हुआ। उस समय यह जहाज दुबई पोर्ट के एंकरेज क्षेत्र में खड़ा था और ईरानी सेना द्वारा किए गए इस सीधे हमले ने जहाज के परिचालन को बाधित कर दिया। केपीसी ने बताया कि हमले के दौरान टैंकर अपनी पूरी क्षमता के साथ कच्चे तेल से लदा हुआ था। हमले की प्रकृति और उपयोग किए गए हथियारों के बारे में विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि यह एक लक्षित सैन्य कार्रवाई थी।

जहाज को हुई क्षति और आपातकालीन राहत कार्य

हमले के परिणामस्वरूप 'अल-साल्मी' के बाहरी हिस्से (hull) को गंभीर नुकसान पहुंचा है। केपीसी के बयान के अनुसार, हमले के तुरंत बाद जहाज पर आग लग गई। आग लगने और जहाज के ढांचे को नुकसान पहुंचने के कारण आसपास के समुद्री जल में तेल के रिसाव का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। घटना की सूचना मिलते ही आपातकालीन प्रतिक्रिया और अग्निशमन टीमों को तुरंत सक्रिय किया गया। वर्तमान में ये टीमें संबंधित स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने और आग बुझाने के कार्य में जुटी हुई हैं। कॉर्पोरेशन ने यह भी पुष्टि की है कि चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

डीसैलिनेशन प्लांट पर हमला और भारतीय नागरिक की मृत्यु

इस समुद्री हमले से ठीक एक दिन पहले, सोमवार को कुवैत के एक पावर एंड वाटर डीसैलिनेशन प्लांट पर भी हमला किया गया था। कुवैत के ऊर्जा मंत्रालय और सरकारी समाचार एजेंसी केयूएनए (KUNA) के अनुसार, इस हमले में प्लांट के परिसर की एक इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि इस हमले में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने इस घटना की पुष्टि करते हुए भारतीय नागरिक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। 28 फरवरी को ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच शुरू हुए इस ताजा संघर्ष के बाद से यह जमीन पर मारा जाने वाला पहला भारतीय नागरिक है। इस मौत के साथ ही इस युद्ध में मारे गए भारतीयों की कुल संख्या 8 हो गई है।

ईरान का आधिकारिक पक्ष और इजराइल पर आरोप

ईरान ने कुवैत के डीसैलिनेशन प्लांट पर किए गए हमले में अपनी संलिप्तता से साफ इनकार किया है। ईरानी सेना के ऑपरेशनल कमांड 'खतम अल-अनबिया' ने एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने ऐसा कोई हमला नहीं किया है। ईरान ने इसके विपरीत इजराइल पर आरोप लगाया है कि यह हमला 'जायनिस्ट ताकतों' की एक साजिश है ताकि ईरान की छवि खराब की जा सके और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोषी ठहराया जा सके। हालांकि, कुवैती अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों द्वारा इन दावों की सत्यता की जांच की जा रही है। ईरान और इजराइल के बीच जारी यह आरोप-प्रत्यारोप क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य अस्थिरता को और बढ़ा रहा है।

खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और पर्यावरणीय चुनौतियां

कुवैती तेल टैंकर पर हुए इस हमले ने खाड़ी क्षेत्र में तेल की आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने कहा है कि वे जहाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पर्यावरण पर पड़ने वाले किसी भी संभावित प्रभाव को कम करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं। तेल रिसाव की स्थिति में समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाले नुकसान का आकलन करने के लिए विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है, क्योंकि दुबई जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र के पास इस तरह का हमला वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।