राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार को उस समय भारी हंगामा हो गया जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया गया। यह घटना जयपुर के बगरू इलाके में स्थित रामपुरा-कंवरपुरा गांव की है, जहां सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और उनके साथी कार्यकर्ता एक राजकीय प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। सुबह करीब 10 बजे हुई इस घटना ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। बताया जा रहा है कि जब सीजेपी की टीम स्कूल पहुंची, तो वहां मौजूद ग्रामीणों के साथ उनका आमना-सामना हुआ, जिसके बाद स्थिति हिंसक हो गई। ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं को पीटकर वहां से खदेड़ दिया और उनके वाहनों पर जमकर पथराव किया।
हमले का विवरण और नुकसान
प्रत्यक्षदर्शियों और सीजेपी पदाधिकारियों के अनुसार, हमला काफी उग्र था। उपद्रवियों ने सीजेपी कार्यकर्ताओं की गाड़ियों को निशाना बनाया और उनके शीशे तोड़ दिए और सीजेपी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि इस पथराव में टीम के वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है और एक वॉलंटियर घायल भी हुआ है। प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर घटना की तस्वीरें और विवरण साझा करते हुए आरोप लगाया कि उनके साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए और उन्होंने इस पूरी घटना को लोकतंत्र पर हमला करार दिया है और कहा कि यह सब सत्ता के संरक्षण में हुआ है।
भाजपा और शिक्षा मंत्री पर गंभीर आरोप
इस घटना को लेकर सीजेपी ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया है और अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि हमलावर भाजपा के कार्यकर्ता थे और यह हमला सरकार की नाकामियों को छिपाने की एक कोशिश है। वहीं, आशुतोष रांका ने दावा किया कि यह सब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इशारे पर हुआ है। " उन्होंने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और स्कूल निरीक्षण रोकने के आदेश को वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो पूरे राजस्थान में आंदोलन किया जाएगा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की मांग की जाएगी।
तबेले में स्कूल चलने का दावा
सीजेपी की टीम का कहना है कि वे रामपुरा-कंवरपुरा गांव इसलिए पहुंचे थे क्योंकि उन्हें सूचना मिली थी कि वहां का सरकारी स्कूल पिछले कई वर्षों से भैंसों के तबेले में संचालित हो रहा है। दीपके के अनुसार, टीम इसी वास्तविक स्थिति का जायजा लेने और इसे जनता के सामने लाने के लिए गई थी। उन्होंने कहा कि भाजपा को इस बात का डर है कि अगर सरकारी स्कूलों की बदहाली सामने आ गई और गरीब बच्चों को अच्छी सुविधाएं मिलने लगीं, तो लोग सरकार से सवाल पूछने लगेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि स्कूलों में पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी पर जिम्मेदार लोग चुप क्यों हैं।
मंत्री बेढम का कांग्रेस पर पलटवार
दूसरी ओर, राजस्थान सरकार के गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। विधानसभा में जब उनसे इस घटना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे कांग्रेस की एक सोची-समझी साजिश बताया। मंत्री बेढम ने कहा कि कांग्रेस के लोग डुप्लीकेसी कर रहे हैं और ऐसी परिस्थितियां पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे जनता का ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ता ही सीजेपी का मुखौटा पहनकर खुद पर हमला करवा रहे हैं। बेढम ने यह भी कहा कि कांग्रेस का ध्यान जनहित के कार्यों पर नहीं है और वे केवल सदन की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसका जवाब जनता समय आने पर देगी।
सीजेपी का संघर्ष जारी रखने का संकल्प
हमले और राजनीतिक बयानबाजी के बीच, सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि वे इस तरह के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। पार्टी का कहना है कि वे गरीब बच्चों के बेहतर भविष्य और सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के सुधार के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे। दीपके ने जोर देकर कहा कि चाहे कितना भी हमला या दबाव बनाया जाए, वे स्कूलों की स्थिति सुधारने की अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे। पार्टी अब इस मामले को लेकर आगे की रणनीति तैयार कर रही है और अल्टीमेटम की अवधि समाप्त होने के बाद बड़े आंदोलन की तैयारी में है।
