महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश के दो बड़े राजनीतिक दिग्गज, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आमने-सामने आ गए हैं। दोनों नेताओं के बीच परिसीमन, जनगणना और 2029 के चुनावों से पहले आरक्षण लागू करने की समयसीमा को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और रिजिजू ने कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान प्रशासनिक फैसलों का हवाला देते हुए पलटवार किया।
रिजिजू का कांग्रेस पर हमला और इंदिरा गांधी का जिक्र
किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी पर अपनी गलतियों और कमियों को स्वीकार न करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का एक पुराना वीडियो साझा किया, जिसमें वह आपातकाल के दौरान मोरारजी देसाई और अन्य विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी का बचाव कर रही थीं। रिजिजू ने लिखा कि हालांकि वह इंदिरा गांधी की नीतियों से सहमत नहीं हैं, लेकिन उन्होंने कम से कम अपने कार्यों को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था। रिजिजू का तर्क था कि वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व अपनी गलतियों को पहचानने में भी सक्षम नहीं है। यह टिप्पणी राहुल गांधी द्वारा महिला आरक्षण विधेयक को बिना शर्त समर्थन देने की चुनौती के जवाब में आई थी।
राहुल गांधी ने पूछा: 2023 का कानून अब तक लागू क्यों नहीं?
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के उस फैसले पर सवाल उठाया जिसमें महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते रिजिजू को यह पता होना चाहिए कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पहले ही कांग्रेस के पूर्ण समर्थन से पारित हो चुका है। उन्होंने सवाल किया कि तीन साल बीत जाने के बाद भी इसे लागू क्यों नहीं किया गया है और सरकार इसे बेवजह परिसीमन से क्यों जोड़ रही है। राहुल गांधी ने मांग की कि 2023 के कानून को बिना किसी शर्त के तुरंत लागू किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके।
कर्नाटक कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व पर रिजिजू का पलटवार
राहुल गांधी के पोस्ट के जवाब में किरेन रिजिजू ने एक और पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। रिजिजू ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि कर्नाटक में डीके शिवकुमार की कैबिनेट में एक भी महिला मंत्री शामिल नहीं है और उन्होंने कहा कि यह स्थिति 33 प्रतिशत महिला कोटे पर कांग्रेस के दोहरे मापदंडों को उजागर करती है। रिजिजू ने तर्क दिया कि जो पार्टी अपने राज्य की कैबिनेट में महिलाओं को जगह नहीं दे पा रही है, वह केंद्र सरकार की प्रक्रियाओं पर सवाल उठा रही है।
संवैधानिक प्रक्रिया और देरी के कारण
रिजिजू ने विस्तार से बताया कि महिला आरक्षण को लागू करने में संवैधानिक अड़चनें क्या हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण संविधान (106वां संशोधन) एक्ट 2023 के तहत दिया गया है। यह कानून तभी प्रभावी होगा जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। परिसीमन की यह प्रक्रिया साल 2023 के बाद होने वाली जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगी, यानी साल 2026 के बाद प्रकाशित होने वाले आंकड़े। रिजिजू ने बताया कि जनगणना की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन जाति आधारित जनगणना की मांग के कारण इसमें देरी हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परिसीमन जल्द शुरू नहीं हुआ, तो आरक्षण 2034 के चुनावों तक खिंच सकता है। इसलिए 2029 के चुनावों में इसे लागू करने के लिए परिसीमन का काम जल्द शुरू करना अनिवार्य है।
131वां संशोधन विधेयक और विपक्ष की मांग
इस पूरे विवाद की जड़ में परिसीमन और आरक्षण का जुड़ाव है। विपक्ष चाहता है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर तुरंत लागू किया जाए। गौरतलब है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है, लेकिन 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) बिल गिर गया था। यह बिल इसलिए पारित नहीं हो सका क्योंकि इसे सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया। इस विधेयक में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान एक साथ शामिल थे। अब सरकार और विपक्ष के बीच इसी प्रक्रियात्मक देरी को लेकर राजनीतिक युद्ध जारी है।
