इजराइल से रिश्ते रखे तो तबाह कर देंगे, लश्कर डिप्टी चीफ की धमकी

लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने पर जान से मारने और बर्बाद करने की खुली धमकी दी है।

पाकिस्तान के भीतर आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने पाकिस्तान की सत्ता और सेना को सीधी और खुली धमकी दी है। इस धमकी के बाद पूरे पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य गलियारों में हड़कंप मच गया है। कसूरी ने विशेष रूप से पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को चेतावनी दी है। उसने कहा है कि अगर पाकिस्तान का कोई भी नेता इजराइल को किसी भी तरह का समर्थन देने या उसके साथ संबंध सुधारने की कोशिश करता है, तो उसे जान से मार दिया जाएगा और उसे पूरी तरह से तबाह और बर्बाद कर दिया जाएगा।

धमकी के पीछे का मुख्य कारण

सैफुल्लाह कसूरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में इजराइल के साथ संबंधों को लेकर पर्दे के पीछे चर्चाओं और अटकलों का बाजार गर्म है और कसूरी की यह धमकी इस बात का साफ संकेत देती है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी और जिहादी आतंकी संगठनों का प्रभाव आज भी कितना मजबूत है। ये संगठन अब इतने बेखौफ हो गए हैं कि वे देश के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख को भी निशाना बनाने की बात कर रहे हैं और यह स्थिति पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है, क्योंकि जिन संगठनों को कभी राज्य का समर्थन प्राप्त था, वे अब राज्य के नेतृत्व के ही खिलाफ खड़े हो गए हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की मांग और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

इस पूरे विवाद की जड़ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह मांग भी है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान से इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने को कहा था और ट्रंप ने हाल ही में पाकिस्तान को अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा था। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ किसी भी संभावित शांति समझौते को अब्राहम अकॉर्ड्स के विस्तार से जोड़ा था। उन्होंने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे मुस्लिम बहुल देशों से अपील की थी कि वे इजराइल को औपचारिक रूप से मान्यता दें। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने ट्रंप की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि वह इजराइल के साथ अपने रिश्तों को सामान्य नहीं करेगा।

आतंकी संगठनों का बढ़ता दुस्साहस

सैफुल्लाह कसूरी की धमकी ने यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान के लिए वे आतंकी संगठन अब सिरदर्द बन चुके हैं जिन्हें कभी उसकी अपनी खुफिया एजेंसियों ने खड़ा किया था। पहलगाम हमले जैसी घटनाओं के बाद इन संगठनों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे खुद को सरकार और सेना से भी ऊपर समझने लगे हैं। यह पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक खतरनाक संकेत है। आतंकी संगठन अब सीधे तौर पर विदेश नीति के फैसलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे हैं और अपनी बात मनवाने के लिए हिंसा का सहारा लेने की धमकी दे रहे हैं।

पाकिस्तान सरकार की मुश्किल स्थिति

फिलहाल पाकिस्तान सरकार एक दोहरी मुश्किल में फंसी नजर आ रही है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका जैसे देशों का दबाव है कि वह अपनी विदेश नीति में बदलाव करे और इजराइल के प्रति अपना रुख नरम करे। दूसरी तरफ, देश के भीतर सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन किसी भी ऐसे बदलाव के खिलाफ खून-खराबे की धमकी दे रहे हैं। पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर तो ट्रंप के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, लेकिन कसूरी की धमकी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वहां की सरकार और सेना के लिए आने वाले दिन काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।