पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आज का दिन विरोध और प्रदर्शनों के नाम रहने वाला है। पाकिस्तानी सरकार और वहां की फौज के खिलाफ आम जनता का गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है। आज, 5 जुलाई को, पूरे क्षेत्र में पाकिस्तानी फौज के दमनकारी रवैये और बुनियादी मानवाधिकारों की मांग को लेकर एक विशाल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी प्रशासन उनकी आवाज को दबाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है, लेकिन अब जनता अपने हक के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार है। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान PoK में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर खींचना है।
रावलाकोट रैली में सेना पर लगे गंभीर आरोप
इस विरोध प्रदर्शन की नींव रावलाकोट में हुई एक विशाल रैली के दौरान रखी गई थी और इस रैली को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मेहराह ख्वाजा ने पाकिस्तानी फौज पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए। उन्होंने सीधे तौर पर सेना पर निर्दोष नागरिकों की निर्मम हत्या करने का आरोप मढ़ा। ख्वाजा ने कड़े शब्दों में कहा कि दुनिया के किसी भी कानून में सेना को यह अधिकार नहीं दिया गया है कि वह आम लोगों की जान ले। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेना का काम सुरक्षा करना है, न कि अपने ही नागरिकों का दमन करना और उनके इस बयान ने स्थानीय लोगों के बीच सुलग रही नाराजगी को और हवा दे दी है।
मेहराह ख्वाजा ने केवल सेना ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम नहीं है, तो उन्हें तुरंत सत्ता छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने राजनेताओं की विफलता को रेखांकित करते हुए कहा कि जनता अब और अधिक खोखले वादों पर भरोसा नहीं करेगी और यह मांग PoK में शासन व्यवस्था के प्रति बढ़ते अविश्वास को दर्शाती है, जहां लोग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
विदेशों में रह रहे कश्मीरियों से एकजुट होने की अपील
इस आंदोलन को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए मेहराह ख्वाजा ने विदेशों में रह रहे कश्मीरी समुदाय से भी विशेष अपील की है। उन्होंने ब्रिटेन सहित अन्य देशों में बसे कश्मीरियों से अनुरोध किया है कि वे आज, 5 जुलाई को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करें। उन्होंने विशेष रूप से बर्मिंघम से लेकर लंदन तक रहने वाले सभी कश्मीरियों को एकजुट होने के लिए कहा है। ख्वाजा का मानना है कि जब विदेशों में रहने वाले लोग पाकिस्तान के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाएंगे, तभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर PoK के वास्तविक हालात की चर्चा होगी। यह अपील इस आंदोलन को एक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने की कोशिश है।
संसाधनों का दोहन और बाजार बंद करने का आह्वान
आर्थिक मोर्चे पर भी PoK के लोगों में भारी असंतोष है। मेहराह ख्वाजा के अनुसार, पाकिस्तान पिछले कई दशकों से PoK के प्राकृतिक और अन्य संसाधनों का बेरहमी से दोहन कर रहा है, लेकिन इसका लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है और उन्होंने आरोप लगाया कि जब जनता अपने संसाधनों पर अपना हक मांगती है या अपनी समस्याएं सुनाती है, तो सरकार उनकी सुनने के बजाय दमन का रास्ता चुनती है। इसी के विरोध में उन्होंने आज बाजारों को पूरी तरह बंद रखने और सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी का समर्थन
आज होने वाले इस बड़े आंदोलन को जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का भी पूरा समर्थन प्राप्त है। कमेटी के प्रमुख सदस्य सरदार अमन खान ने 5 जुलाई के इस प्रस्तावित आंदोलन को सफल बनाने के लिए जनता से सहयोग मांगा है। उन्होंने कश्मीर घाटी और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों से भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और एकजुटता दिखाने की अपील की है। JAAC का मानना है कि यह लड़ाई केवल कुछ लोगों की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के अस्तित्व और अधिकारों की है।
बुनियादी अधिकारों का दमन और आवश्यक वस्तुओं की किल्लत
सरदार अमन खान ने क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले 1 महीने से PoK में उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है जो अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने एक बहुत ही चिंताजनक तथ्य साझा किया कि प्रशासन द्वारा खाद्य आपूर्ति और दवाओं की आवाजाही में जानबूझकर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। लोगों की आवाज को दबाने के लिए उन्हें बुनियादी जरूरतों से वंचित किया जा रहा है। JAAC ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण है और वे केवल नागरिकों के मूल लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए जमीन पर संघर्ष कर रहे हैं। आज का प्रदर्शन इसी संघर्ष की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
