जैसलमेर के पवित्र तीर्थ स्थल रामदेवरा में रविवार को सामाजिक एकता मंच के तत्वावधान में ऐतिहासिक 'मारवाड़ महासम्मेलन' का आयोजन किया गया। इस भव्य सम्मेलन में हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना और क्षेत्र के विकास के लिए एक ठोस रूपरेखा तैयार करना था और सम्मेलन के दौरान बेरोजगारी का शमन, जातिवाद का उन्मूलन और पर्यावरण संरक्षण जैसे तीन प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
सर्वोदय कलश और सामाजिक समरसता का संदेश
महासम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण और भावुक क्षण 'जल समागम' रहा। सामाजिक भेदभाव को मिटाने के उद्देश्य से विभिन्न जातियों और वर्गों के लोग अपने-अपने घरों से जल लेकर आए थे। इस जल को एकता के प्रतीक के रूप में एक ही 'सर्वोदय कलश' में प्रवाहित किया गया। उपस्थित जनसमूह ने इस अवसर पर जातिवाद के समूल नाश की सामूहिक सौगंध खाई। आयोजकों के अनुसार, यह पहल समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोने और ऊंच-नीच की भावना को समाप्त करने के लिए की गई थी।
बेरोजगारी उन्मूलन और सौर ऊर्जा का प्रस्ताव
यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन (यूजीपीएफ) के चेयरमैन और उद्योगपति मेघराज सिंह रॉयल ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए बेरोजगारी को वर्तमान समय की सबसे गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने राजस्थान की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं और उन्होंने सुझाव दिया कि यदि बेरोजगार युवाओं और किसानों को मात्र 10% बंजर भूमि आवंटित कर सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जोड़ा जाए, तो इससे लाखों रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और करोड़ों रुपये की आय सृजित की जा सकती है।
तकनीकी चुनौतियां और स्थानीय व्यापार का समर्थन
संबोधन के दौरान मेघराज सिंह रॉयल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी उभरती तकनीकों के प्रति युवाओं को सचेत किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में तकनीक के कारण पारंपरिक रोजगार के अवसरों में कमी आ सकती है और 0' की संज्ञा दी। उन्होंने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विदेशी प्लेटफार्मों के बजाय स्थानीय व्यापारियों और स्वदेशी उत्पादों का समर्थन करने की अपील की।
कौशल विकास और शिक्षा के क्षेत्र में पहल
सम्मेलन में फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों का विवरण भी प्रस्तुत किया गया। यूजीपीएफ के मैनेजर मुकेश मेघवाल ने जानकारी दी कि सूर्यगढ़ में 100 युवाओं को होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें उन्हें ₹25,000 प्रतिमाह का स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, फाउंडेशन द्वारा 700 बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। मोटिवेटर डॉ विक्रांत सिंह तोमर ने भी मानवीय मूल्यों और सामाजिक समरसता पर अपने विचार साझा किए।
युवाओं के लिए डिजिटल जागरूकता और भविष्य की योजना
छात्रसंघ अध्यक्ष अरविंद सिंह भाटी ने युवाओं को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग को 'डिजिटल कोकीन' बताया और इससे बचने की सलाह दी और कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा एक विशेष पुस्तिका का वितरण किया गया। इस पुस्तिका में बेरोजगारी उन्मूलन और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया गया है और सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों ने इन योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सामूहिक सहयोग का आश्वासन दिया।
