RBSE 12वीं रिजल्ट: पाक बॉर्डर के पास रहने वाली दिव्या भादू बनीं टॉपर

राजस्थान बोर्ड 12वीं परीक्षा में बाड़मेर की दिव्या भादू ने 500 में से 499 अंक प्राप्त कर प्रदेश टॉप किया है। पाकिस्तान सीमा से महज 1 किमी दूर स्थित गांव की रहने वाली दिव्या अब आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) द्वारा घोषित 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों में बाड़मेर जिले की दिव्या भादू ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राज्य में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। दिव्या ने कुल 500 अंकों में से 499 अंक हासिल किए हैं। उनकी यह सफलता इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि वह भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के अत्यंत निकट स्थित एक छोटे से गांव की निवासी हैं। 23% रहा है, जिसमें दिव्या सहित पांच छात्रों ने संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान साझा किया है।

भारत-पाक सीमा पर स्थित कृष्ण का तला गांव

दिव्या भादू मूल रूप से बाड़मेर जिले के 'कृष्ण का तला' गांव की रहने वाली हैं। भौगोलिक दृष्टि से यह गांव सामरिक रूप से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में आता है, क्योंकि इसकी दूरी पाकिस्तान सीमा से मात्र 1 किमी है। दिव्या के अनुसार, उनके परिवार के खेत अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल पास स्थित हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में रहने के कारण वहां की चुनौतियां सामान्य क्षेत्रों से भिन्न होती हैं, लेकिन इन परिस्थितियों के बावजूद दिव्या ने अपनी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित रखा। उनके गांव के निवासियों के लिए यह गौरव का क्षण है कि सीमा के अंतिम छोर पर स्थित गांव की बेटी ने शैक्षणिक स्तर पर पूरे प्रदेश में नाम रोशन किया है।

ऑपरेशन सिंदूर और गांव खाली करने की चुनौती

अपनी शैक्षणिक यात्रा के दौरान आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए दिव्या ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के समय की परिस्थितियों के बारे में बताया। उन्होंने जानकारी दी कि जब वह सीकर के एक हॉस्टल में रहकर अपनी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं, तब सीमा पर तनाव के कारण उनके गांव को खाली करने की तैयारी की जा रही थी और दिव्या ने बताया कि उनके गांव से पहले सीमा के अन्य नजदीकी गांवों को खाली कराया जा चुका था और उनके परिवार को भी सुरक्षित स्थान पर जाने की सूचना मिली थी। यह समय उनके लिए मानसिक रूप से काफी तनावपूर्ण था, क्योंकि एक तरफ उनकी महत्वपूर्ण परीक्षाएं थीं और दूसरी तरफ परिवार की सुरक्षा की चिंता और हालांकि, बाद में गांव खाली करने का आदेश टल गया, जिससे उन्होंने राहत महसूस की और अपनी पढ़ाई जारी रखी।

शैक्षणिक प्रदर्शन और विषयों का विवरण

दिव्या भादू के परीक्षा परिणामों का विश्लेषण करने पर उनकी शैक्षणिक प्रतिभा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है और उन्होंने विज्ञान संकाय के चार प्रमुख विषयों—अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान (Physics), रसायन विज्ञान (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology)—में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए हैं। दिव्या का केवल एक अंक हिंदी विषय में कटा है, जिसमें उन्हें 99 अंक मिले हैं। 80% का स्कोर प्राप्त किया है। दिव्या ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन और माता-पिता के निरंतर सहयोग को दिया है। उन्होंने सीकर के शेखावाटी स्कूल लोसेल में रहकर अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और पिता का सहयोग

दिव्या के परिवार में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण रहा है। उनके पिता सुजाराम भादू सहायक ग्राम विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता द्रौपदी देवी एक गृहिणी हैं। दिव्या के अनुसार, उनके पिता ने हमेशा उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया और सीमावर्ती क्षेत्र में संसाधनों की कमी के बावजूद उन्हें पढ़ाई के लिए सीकर भेजा। उनके गांव के कई अन्य बच्चे भी शिक्षा के लिए बाहर जाते हैं, लेकिन दिव्या की इस उपलब्धि ने गांव के अन्य छात्रों के लिए एक नया मानक स्थापित किया है। उनके पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बेटी की मेहनत ने आज पूरे परिवार और जिले का मान बढ़ाया है।

भविष्य का लक्ष्य: प्रशासनिक सेवा और भ्रष्टाचार के विरुद्ध संकल्प

अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए दिव्या भादू ने स्पष्ट किया कि वह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी करना चाहती हैं। उनका प्राथमिक लक्ष्य एक आईएएस (IAS) अधिकारी बनना है। दिव्या का कहना है कि वह प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए कार्य करना चाहती हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यदि वह प्रशासनिक अधिकारी बनती हैं, तो उनका मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़ना और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना होगा। दिव्या अब स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने की योजना बना रही हैं।