राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 'विकसित भारत' कार्यक्रम के दौरान देश के युवाओं को एक सशक्त और प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास हमें चुनौती देता है और हमें उससे सबक सीखना चाहिए। डोभाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास की गलतियों से सीखकर 'प्रतिशोध' की भावना की शक्ति का इस्तेमाल करें ताकि देश को उसकी पुरानी गरिमा और शक्ति वापस दिलाई जा सके।
डोभाल ने अपने संबोधन में राष्ट्र के मनोबल और मजबूत नेतृत्व के महत्व पर जोर दिया और उन्होंने कहा कि एक उच्च मनोबल और सक्षम नेतृत्व ही किसी भी राष्ट्र को स्वतंत्र और शक्तिशाली बनाता है। उन्होंने समझाया कि आज भी दुनिया भर में जो युद्ध और संघर्ष हो रहे हैं, उनमें कुछ देश अपनी इच्छा दूसरों पर थोपना चाहते हैं और इसके लिए वे बल प्रयोग करते हैं। उनका मानना है कि लड़ाइयाँ केवल दुश्मन की लाशें देखकर संतुष्ट होने के लिए नहीं लड़ी जातीं, बल्कि इसलिए लड़ी जाती। हैं ताकि किसी देश का मनोबल तोड़ा जा सके और उसे अपनी शर्तों पर संधि करने के लिए मजबूर किया जा सके। जब किसी राष्ट्र में इच्छाशक्ति होती है, तो उसका मनोबल बढ़ता है, और यही उसे शक्तिशाली और स्वतंत्र बनाता है।
इतिहास की गलतियों से सीखना
एनएसए डोभाल ने युवाओं को इतिहास की उन कड़वी सच्चाइयों से अवगत कराया जब भारत को बाहरी आक्रमणकारियों द्वारा लूटा गया और अपमानित किया गया और उन्होंने कहा कि हमारे गाँव जलाए गए, हमारी सभ्यता को समाप्त करने का प्रयास किया गया, हमारे मंदिरों को लूटा गया, और हम एक मूकदर्शक की तरह असहाय होकर देखते रहे। यह इतिहास हमें एक चुनौती देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज हर युवा के मन में 'प्रतिशोध' की भावना होनी चाहिए। डोभाल ने स्वीकार किया कि 'प्रतिशोध' कोई अच्छा शब्द नहीं है, लेकिन यह अपने आप में एक शक्तिशाली शब्द है, जो राष्ट्र को फिर से खड़ा करने की प्रेरणा दे सकता है।
'प्रतिशोध' का अर्थ और उद्देश्य
डोभाल ने 'प्रतिशोध' शब्द के अपने विशेष अर्थ को स्पष्ट किया। उनका आशय किसी से व्यक्तिगत बदला लेने से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक गलतियों को। सुधारने और राष्ट्र को उसकी खोई हुई पहचान और शक्ति वापस दिलाने से था। उन्होंने कहा कि हमें अपने इतिहास का प्रतिशोध लेना चाहिए, जिसका अर्थ है कि हमें अपने देश को फिर से उस। मुकाम पर पहुंचाना है जहाँ से हम अपने हक, विचार और आस्थाओं के आधार पर एक महान राष्ट्र का निर्माण कर सकें। उन्होंने याद दिलाया कि भारत की सभ्यता बहुत विकसित थी, हमने कभी किसी के मंदिर नहीं तोड़े, कहीं जाकर लूट नहीं की, और न ही किसी बाहरी देश पर आक्रमण किया।
सुरक्षा के प्रति उदासीनता का सबक
एनएसए डोभाल ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कैसे हम अपनी सुरक्षा और बाहरी खतरों को समझने में विफल रहे और उनके प्रति उदासीन रहे, जिसका परिणाम इतिहास ने हमें सबक सिखाकर दिया। उन्होंने युवाओं से पूछा कि क्या हम उस सबक को याद रखेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आने वाली पीढ़ी उस सबक। को भूल गई, तो यह देश की सबसे बड़ी त्रासदी होगी। यह एक गंभीर चेतावनी थी कि अतीत की गलतियों को। दोहराने से बचने के लिए निरंतर सतर्कता और आत्म-जागरूकता आवश्यक है।
व्यक्तिगत अनुभव और वर्तमान नेतृत्व की प्रशंसा
डोभाल ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति के बारे में एक व्यक्तिगत टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम में बुलाने के लिए मंत्री जी का धन्यवाद, लेकिन उन्हें। थोड़ी उलझन थी क्योंकि यह युवाओं का कार्यक्रम है और उनकी उम्र में बड़ा अंतर है। उन्होंने बताया कि वे आजाद भारत में पैदा नहीं हुए थे, बल्कि उनका जन्म तब हुआ था जब देश गुलाम था। यह टिप्पणी उनके अनुभव और स्वतंत्रता के महत्व को दर्शाती है। उन्होंने वर्तमान नेतृत्व की भी प्रशंसा की, यह कहते हुए कि आज हम बहुत भाग्यशाली हैं कि देश में ऐसा नेतृत्व है, जिसने देश को 10 साल में 'ऑटो मोड' में ला दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की तीव्र प्रगति को स्वीकार किया।
विकसित भारत का नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता
डोभाल ने युवाओं से कहा कि मोदी जी भारत को जिस गति से लेकर चल रहे हैं, इसे विकसित तो होना ही है, लेकिन सवाल यह है कि विकसित भारत का नेतृत्व कौन करेगा और उन्होंने युवाओं को विकसित भारत का नेता बनने के लिए निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जो निर्णय लिए जाएं, वे केवल आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के लिए होने चाहिए। उन्होंने नए साल के संकल्पों का उदाहरण देते हुए कहा कि सही निर्णय लेना और दूरंदेशी से फैसले लेना बहुत जरूरी है। उन्होंने युवाओं में असीम संभावनाओं को रेखांकित किया और उन्हें अपने पूर्वजों के बलिदानों को याद रखने के लिए प्रेरित किया, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और अपमान सहे। भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी जैसे नेताओं के संघर्षों का उल्लेख करते हुए,। उन्होंने युवाओं को स्वतंत्र भारत के महत्व को समझने और उसे बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।