पश्चिमी एशिया में 28 फरवरी से छिड़े युद्ध ने समंदर के रास्ते होने वाले वैश्विक व्यापार की पूरी सूरत को बदलकर रख दिया है। इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति करने वाले विशालकाय जहाज अब रडार से छिपकर चलने को मजबूर हो गए हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले ऑयल टैंकर अपने ऑटोमैटिक ट्रैकिंग सिस्टम यानी एआईएस को बंद कर रहे हैं ताकि उन पर होने वाले संभावित हमलों से बचा जा सके। समंदर में अंधे होकर चलने की यह रणनीति अब वैश्विक ऊर्जा व्यापार का एक नया हिस्सा बन गई है, जिससे जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जहाजों के रडार से गायब होने के पीछे के कारण
पहले के समय में केवल ईरान या रूस जैसे देश ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए अपने जहाजों के ट्रैकिंग सिस्टम को बंद किया करते थे। शिपिंग की तकनीकी भाषा में इसे शैडो फ्लीट के नाम से जाना जाता था। लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है, युद्ध की वजह से एक बेहद संवेदनशील इलाका बन गया है। व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों को अत्यधिक सतर्क कर दिया है और अब अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन देशों के बड़े जहाज भी खुद को रडार से छिपाकर यह इलाका पार कर रहे हैं जिन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। वोर्टेक्सा के आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च से लेकर मई के अंत तक इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले 57 प्रतिशत जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद रखे थे।
भारतीय बाजारों तक सुरक्षित पहुंच रही ऊर्जा सप्लाई
इस पूरे वैश्विक संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य टैंकरों के ट्रैफिक में 95 प्रतिशत तक की गिरावट आने के बावजूद भारत के लिए राहत की खबर है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह से अडिग है और कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी की जरूरी खेप बिना किसी रुकावट के भारतीय तटों तक पहुंच रही है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 40 प्रतिशत, एलएनजी का 60 प्रतिशत और एलपीजी का करीब 90 प्रतिशत आयात इसी क्षेत्र से करता है। डेटा यह स्पष्ट करता है कि कच्चे तेल के साथ-साथ अब क्लीन प्रोडक्ट्स जैसे पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल और रसोई गैस ले जाने वाले जहाज भी इसी डार्क मोड का इस्तेमाल करके भारतीय बंदरगाहों तक सुरक्षित पहुंच रहे हैं।
खतरनाक लेकिन जरूरी रणनीति
अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुसार, जहाजों का एआईएस हमेशा चालू रहना चाहिए ताकि अन्य जहाजों को उनकी स्थिति का पता चल सके। सिस्टम बंद करने से जहाज पूरी तरह से अदृश्य हो जाते हैं, जिससे होर्मुज जैसे भारी ट्रैफिक वाले रास्ते पर अन्य जहाजों से टक्कर होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि, युद्ध के डर ने इस तकनीकी खतरे को पीछे छोड़ दिया है। शिपिंग उद्योग के विशेषज्ञ मानते हैं कि डार्क शिपिंग अब कोई अपवाद नहीं, बल्कि काम करने का नया तरीका बन गया है। यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों की राष्ट्रीय कंपनियों के जहाज भी इसी रणनीति पर चल रहे हैं। मई महीने में इस जलडमरूमध्य से छिपकर निकलने वाले जहाजों में 67 प्रतिशत हिस्सेदारी इन्हीं देशों की थी, जिसमें अकेले यूएई की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत रही। इन खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था ऊर्जा निर्यात पर टिकी है, इसलिए वे अपनी सप्लाई चेन को किसी भी कीमत पर रुकने नहीं दे सकते।
