पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का तीन दिवसीय तेहरान दौरा बिना किसी सफलता के समाप्त हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे मुनीर को ईरान की ओर से दो टूक जवाब मिला है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी स्थिति में अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ेगा और न ही अमेरिका के आगे झुकेगा और इस दौरे को पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन तेहरान के सख्त रुख ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम पर ईरान का कड़ा रुख
इस्लामाबाद की ओर से की गई मध्यस्थता की कोशिशों के बावजूद ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ और तेहरान ने साफ तौर पर कहा कि वह अपने एनरिच यूरेनियम (Enriched Uranium) को किसी भी अन्य पक्ष को ट्रांसफर नहीं करेगा। इससे पहले जनरल मुनीर ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप तक यह संदेश पहुँचाने का प्रयास किया था कि ईरान यूरेनियम ट्रांसफर के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन ईरान के आधिकारिक रुख ने इन दावों को खारिज कर दिया। ईरान ने अपनी पूर्व शर्तों पर कायम रहते हुए किसी भी प्रकार के सरेंडर से इनकार कर दिया है।
ईरानी नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय बैठकें
जनरल आसिम मुनीर बुधवार, 15 अप्रैल को तेहरान पहुंचे थे। अपने तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे के दौरान उन्होंने ईरान के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के साथ गहन चर्चा की। मुनीर ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की।
इन बैठकों में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जनरल मुनीर ने किया, जिसमें पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी शामिल थे।
मध्यस्थता के प्रयास और क्षेत्रीय सुरक्षा
यह यात्रा अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के पाकिस्तान के प्रयासों का हिस्सा थी। जनरल मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते के बाद ईरान का दौरा करने वाले पहले विदेशी सैन्य नेता बने। इंटर-सर्विसेस पब्लिक रिलेशंस (ISPR) द्वारा जारी बयान के अनुसार, इन मुलाकातों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति, वर्तमान राजनयिक प्रयासों और लंबित मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर देना था।
विफल रही ट्रंप को खुश करने की रणनीति
पाकिस्तान इस वार्ता को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा था ताकि वह अमेरिकी प्रशासन, विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर सके। हालांकि, ईरान द्वारा अपनी शर्तों से पीछे हटने से इनकार करने के बाद मुनीर को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। आईएसपीआर ने जोर दिया कि चर्चाओं में क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया गया था, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर ईरान की अडिग स्थिति ने पाकिस्तान के मध्यस्थता मिशन को 'ढाक के तीन पात' साबित कर दिया। शनिवार को जनरल मुनीर का यह दौरा आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया।
