वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़े घटनाक्रम के तहत दुनिया के सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले देशों ने औपचारिक रूप से एक नया मंच तैयार किया है। इस गठबंधन में कुल 34 देश शामिल हैं और पाकिस्तान को इस महत्वपूर्ण संगठन की अध्यक्षता सौंपी गई है। पाकिस्तान पर वर्तमान में 291 अरब डॉलर का भारी कर्ज है और अब वह इन देशों का नेतृत्व करेगा। इस मंच का गठन संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UNCTAD) के सहयोग से किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य विकासशील देशों को कर्ज से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करने और समाधान खोजने के लिए एक साझा मंच प्रदान करना है।
गठबंधन का गठन और पाकिस्तान की भूमिका
कर्जदार देशों के लिए इस विशेष मंच को बनाने की प्रक्रिया अप्रैल 2026 में शुरू हुई थी। शुरुआत में मिस्र को इस संगठन का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया गया था ताकि शुरुआती ढांचे को तैयार किया जा सके। हाल ही में थाईलैंड में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से पाकिस्तान को इसकी कमान सौंपने का निर्णय लिया। इस घोषणा के अनुसार पाकिस्तान के वित्त मंत्री औरंगजेब इस संगठन के अगले अध्यक्ष होंगे और वह एक साल के लिए इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगे और पाकिस्तान सरकार के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक कर्ज लगभग 81 लाख 40 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपये यानी 293 अरब डॉलर है, जिसमें घरेलू और विदेशी दोनों तरह का सरकारी कर्ज शामिल है।
गठबंधन में शामिल सदस्य देश
UNCTAD के मुताबिक इस संगठन में फिलहाल 34 देश शामिल हैं जो अपनी अर्थव्यवस्था को कर्ज के संकट से उबारने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान के अलावा इस गठबंधन में मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, फिजी, सीरिया, सूडान, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, सेंट लूसिया, सिएरा लियोन, नामिबिया और मॉरटिनिया जैसे देश शामिल हैं और इसके अलावा मालदीव, मेडागास्कर, लेबनान, लेसेथो, केन्या, जॉर्डन, होंडारुस, गिनी, घाना, गैवॉन, इस्ताविनी, इक्वाडोर और कांगो जैसे देश भी इस संगठन का हिस्सा हैं। बारबाडोस और भूटान जैसे देशों ने भी इस मंच की सदस्यता ली है ताकि कर्ज प्रबंधन के लिए सामूहिक प्रयास किए जा सकें।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री का दृष्टिकोण
थाईलैंड में हुई बैठक में अध्यक्ष का पद संभालने के बाद पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता यह होगी कि सदस्य देश कैसे कर्ज के जाल से मुक्त हों। उन्होंने ऋण प्रबंधन प्रथाओं को मजबूत करने और आर्थिक सुधारों के लिए एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने के नए तरीके खोजना इस गठबंधन का मुख्य लक्ष्य होगा। पाकिस्तान को एक साल के लिए इस संगठन की कमान मिली है, जिस दौरान वह इन 34 देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करेगा।
विकासशील देशों पर बढ़ता ब्याज का बोझ
यूएन ट्रेड एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देश अपने कर्ज के बदले भारी मात्रा में ब्याज चुका रहे हैं और वर्ष 2025 में विकासशील देशों ने कुल 1 ट्रिलियन का ब्याज चुकाया है, जो कि वर्ष 2010 के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि विकासशील देशों के लिए उधार लेने की लागत विकसित देशों की तुलना में बहुत अधिक है। विकासशील देश सार्वजनिक ऋण पर औसतन 5 पॉइंट 2 प्रतिशत की ब्याज दर का भुगतान करते हैं, जबकि विकसित देशों में यह दर केवल 2 पॉइंट 2 प्रतिशत है। स्थिति इतनी गंभीर है कि 37 लाख लोग ऐसे देशों में रहते हैं जहां सार्वजनिक ऋण पर ब्याज का भुगतान स्वास्थ्य या शिक्षा पर होने वाले कुल खर्च से भी अधिक है।
