बिजनेस / महंगे हो सकते हैं पारले और ब्रिटानिया के बिस्किट, छोटा होगा पैकेट का साइज

AMAR UJALA : Nov 23, 2019, 01:00 AM
बिजनेस डेस्क | देश में सबसे ज्यादा बिस्किट बेचने वाली दो कंपनियां--पारले प्रोडक्ट्स व ब्रिटानिया अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार कर रही हैं। कीमतों के अलावा कंपनियां पैकेट का साइज भी छोटा कर सकती हैं। हालांकि अभी इसको लेकर के किसी तरह का फैसला कंपनियों ने नहीं लिया है। नई कीमतें अगले साल और चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में प्रभावी होंगी।

जीएसटी से पहले कंपनी को 12 फीसदी टैक्स देना होता था। हालांकि कंपनी को उम्मीद थी कि प्रीमियम कैटेगिरी के लिए 12 फीसदी और सस्ते बिस्किट पर पांच फीसदी टैक्स लगेगा। लेकिन अब सभी तरह के बिस्किट पर 18 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है। इसके चलते कंपनियों को इनके दाम बढ़ाने पड़े, जिसका असर बिक्री पर भी पड़ रहा है।

कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी

बिस्किट बनाने में तेल, मैदा और चीनी जैसे कच्चे माल का प्रयोग होता है। इन वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जिसके चलते कंपनियों की लागत बढ़ रही है। कंपनियों ने कहा है कि सभी तरह के बिस्किट की कीमतों में तीन से लेकर के छह फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।

सबसे ज्यादा इन कंपनियों के बिस्किट की खपत

सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में इन दोनों कंपनियों के बिस्किट की सबसे ज्यादा खपत होती है। पारले प्रोडक्टस जो पारले-जी के चलते देश भर में जानी जाती है, वो अपने ग्लूकोज, Marie और मिल्क बिस्किट को स्टैंण्डर्ड ब्रांड के तहत व Bourbon, Hide&Seek और मिलानो का प्लेटिना प्रीमियम रेंज के तहत उत्पादन करती है। इनकी कीमतों में छह फीसदी तक का इजाफा होगा। वही ब्रिटानियां अपने चुनिंदा उत्पादों की कीमतों में तीन फीसदी की बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है।

पारले का दस हजार करोड़ का कारोबार

पारले हर साल 10 हजार करोड़ रुपये के बिस्किट की बिक्री करती है। पारले प्रोडक्ट के कैटेगिरी हेड मयंक शाह ने अगस्त में कहा था कि हम सरकार से जीएसटी कम करने की मांग कर रहे हैं। 100 रुपये प्रति किलो की कीमत वाले बिस्किट पर सबसे ज्यादा जीएसटी लग रहा है। यह बिस्किट पांच रुपये के पैकेट में बेचा जाता है। बिस्किट पर अधिक जीएसटी लागू होने से उपभोक्ताओं के बीच मांग घटी है।

ब्रिटानिया का कहना है कि लोग अब पांच रुपये वाले बिस्किट का पैकेट भी खरीदने के लिए दो बार सोचते हैं। इससे हिसाब लगाया जा सकता है कि लोगों के पास पांच रुपये भी खर्च करना कितना महंगा लग रहा है।  ब्रिटानिया के मैनेजिंग डायरेक्टर वरुण बेरी ने कहा कि 'हमारी ग्रोथ सिर्फ छह फीसदी हुई है। मार्केट ग्रोथ हमसे भी सुस्त है।' नुस्ली वाडिया की कंपनी ब्रिटानिया का साल-दर-साल का शुद्ध लाभ जून तिमाही में 3.5 फीसदी घटकर 249 करोड़ रुपये रहा।

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