ईरान युद्ध: पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों संग बैठक, 'टीम इंडिया' मॉडल पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न ईंधन संकट और आपूर्ति बाधाओं पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। इसमें कोरोनाकाल के 'टीम इंडिया' मॉडल को अपनाने और राज्यों के सहयोग पर जोर दिया गया। सरकार ने ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता का आश्वासन दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक अस्थिरता और भारत पर इसके संभावित प्रभावों की समीक्षा के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य देश में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और युद्ध के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी आर्थिक चुनौती से निपटने के लिए एक एकीकृत रणनीति तैयार करना है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में उन पांच राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए जहां वर्तमान में चुनाव प्रक्रिया जारी है, जिनमें पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी शामिल हैं और केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी महसूस किया जा रहा है।

कोरोनाकाल वाले 'टीम इंडिया' मॉडल का क्रियान्वयन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के दौरान विशेष रूप से 'टीम इंडिया' मॉडल पर जोर दिया, जिसे कोविड-19 महामारी के दौरान सफलतापूर्वक लागू किया गया था। इस मॉडल के तहत केंद्र और राज्य सरकारें राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर एक इकाई के रूप में कार्य करती हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, वर्तमान संकट की स्थिति में केंद्र सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी बड़े पैमाने पर आवश्यक संसाधनों, विशेष रूप से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। वहीं, राज्य सरकारों को इन संसाधनों के जमीनी स्तर पर न्यायसंगत वितरण और कालाबाजारी रोकने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। अधिकारियों के अनुसार, जिस प्रकार कोरोनाकाल में ऑक्सीजन, दवाओं और टीकों के वितरण के लिए समन्वय स्थापित किया गया था, ठीक उसी प्रकार अब ऊर्जा सुरक्षा के लिए राज्यों को केंद्र के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और ईंधन आपूर्ति की स्थिति

भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर पश्चिमी एशियाई देशों से कच्चे तेल, एलपीजी और पीएनजी का आयात करता है। आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' के माध्यम से भारत पहुंचता है, जो वर्तमान युद्ध क्षेत्र के निकट होने के कारण सामरिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। टैंकरों की आवाजाही में आने वाली बाधाओं के कारण हाल के दिनों में आपूर्ति की गति धीमी हुई है। हालांकि, आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने भारत आने वाले तेल टैंकरों को सुरक्षित मार्ग देने की छूट प्रदान की है, जो भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक राहत है। सरकार ने मुख्यमंत्रियों को आश्वस्त किया है कि देश के पास पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है और आपूर्ति को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है।

राजस्व उपाय और एलपीजी की कालाबाजारी पर नियंत्रण

बैठक में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए केंद्र द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई। केंद्र सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ आम जनता पर न पड़े। प्रधानमंत्री ने राज्यों से भी आग्रह किया है कि वे अपने स्तर पर वैट (VAT) में कटौती करने पर विचार करें। इसके अतिरिक्त, एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध भंडारण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को बिना किसी देरी के रसोई गैस उपलब्ध हो सके। अधिकारियों के अनुसार, राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे जिला स्तर पर आपूर्ति की निगरानी करें और जमाखोरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

वित्त मंत्रालय का रुख और निर्यात कर की भूमिका

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ईंधन की उपलब्धता और कीमतों पर सरकार की रणनीति को स्पष्ट किया है। उनके अनुसार, सरकार ने घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने के लिए निर्यात करने वाली रिफाइनरियों पर विशेष कर लगाया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निजी रिफाइनरियां घरेलू बाजार की जरूरतों को नजरअंदाज कर केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दामों पर निर्यात न करें। वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार सरकार कीमतों में होने वाली वृद्धि का बोझ स्वयं वहन करेगी और जनता पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने रात भर काम करके इन नीतियों को तैयार किया और संसद में अधिसूचित करने के बाद सार्वजनिक किया, ताकि देश में ईंधन की कोई कमी न हो।

अफवाहों पर रोक और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा

प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों से अपील की है कि वे अपने-अपने राज्यों में ईंधन की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर लगाम लगाएं। कई राज्यों में पेट्रोल पंपों पर देखी गई लंबी कतारों का मुख्य कारण कमी नहीं, बल्कि अफवाहों के चलते होने वाली 'पैनिक बाइंग' है। पंजाब के उद्योग और वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा के अनुसार, एलपीजी की कमी का संकट काफी हद तक कृत्रिम है क्योंकि लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक कर रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में लॉकडाउन जैसी कोई संभावना नहीं है और आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सक्रिय है। भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत अब पश्चिमी एशिया के अलावा रूस और अन्य वैकल्पिक देशों से भी कच्चे तेल का आयात बढ़ा रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।