उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी की कविताओं का जादू: ताशकंद यूनिवर्सिटी के छात्रों ने 3 कविताओं का किया अनुवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वरचित कविताएं उज्बेकिस्तान में बेहद लोकप्रिय हो रही हैं। ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज के छात्रों ने उनकी तीन कविताओं का उज्बेक भाषा में अनुवाद किया और उन्हें हिंदी और उज्बेक दोनों भाषाओं में पीएम के सामने प्रस्तुत किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान एक अनोखा सांस्कृतिक संगम देखने को मिला है। जहां एक ओर कूटनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री की साहित्यिक रचनाओं ने स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया। ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज के छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने हिंदी भाषा में अपनी शानदार प्रस्तुति दी। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने उनकी प्रसिद्ध कविता अभी तो सूरज उगा है गाकर सुनाई, जो इस मध्य एशियाई देश में भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा के प्रति बढ़ते लगाव को दर्शाता है।

कूटनीतिक संदर्भ और महत्वपूर्ण समझौते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए किर्गिस्तान पहुंचे हैं, लेकिन इससे पहले उनकी उज्बेकिस्तान यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक रही। इस दौरे के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण समझौते हुए। हालांकि, इन रणनीतिक समझौतों के साथ-साथ प्रधानमंत्री की स्वरचित कविताओं ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। पीएम मोदी द्वारा स्वयं लिखी गई ये कविताएं दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम कर रही हैं।

कुकसरॉय पैलेस में विशेष संगीतमय प्रस्तुति

प्रधानमंत्री की कविताओं की जबरदस्त लोकप्रियता उनके उज्बेकिस्तान दौरे की एक सबसे खास बात बनकर उभरी। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने कुकसरॉय पैलेस में एक अनौपचारिक रात्रि भोज का आयोजन किया था। इस गरिमामय अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी की कविता अभी तो सूरज उगा है पर आधारित एक विशेष म्यूजिकल परफॉर्मेंस रखी गई। मोदी की लिखी कविताओं के पाठ को वहां मौजूद दर्शकों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली और यह जल्द ही इस दौरे की सबसे यादगार बातों में से एक बन गई।

छात्रों द्वारा दो भाषाओं में तीन कविताओं का पाठ

ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में छात्रों और शैक्षणिक समुदाय के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत के दौरान एक भावुक सांस्कृतिक पल देखने को मिला। उज्बेक छात्र एक साथ आए और प्रधानमंत्री के सामने उनकी लोकप्रिय कविताएं गाईं और सुनाईं और छात्रों ने कुल 3 कविताएं पेश कीं, जिनमें से प्रत्येक को हिंदी और उज्बेक दोनों भाषाओं में सुनाया गया। यह छात्रों की भाषाई दक्षता और भारतीय साहित्य के प्रति उनके सम्मान को प्रदर्शित करता है।

कविताओं और प्रस्तुति देने वाले छात्रों का विवरण

पहली कविता अभी तो सूरज उगा है की प्रस्तुति ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज के 4 थे साल के छात्र मिस्टर केल्डियोरोव दिलहुशबेक ने हिंदी में दी। इसके तुरंत बाद, इस कविता का उज्बेक अनुवाद 3 रे साल की छात्रा दिलशोदा जुराबोएवा ने सुनाया। यह कविता आशा और नई शुरुआत का संदेश देती है, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित किया।

नए भारत के संकल्पों की गूंज

दूसरी कविता नए भारत के नए संकल्प में एक आत्मविश्वासी और आकांक्षी नए भारत की भावना को खूबसूरती से दर्शाया गया है। इसे हिंदी में 4 थे साल के छात्र ओटाबेक अमीरोव ने सुनाया। वहीं, इस प्रेरणादायक कविता का उज्बेक अनुवाद यूनिवर्सिटी के 3 रे साल के छात्र मिस्टर इकरोमखुजा सादिल्लाएव ने प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति भारत की आधुनिक महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक पटल पर उसके बढ़ते कदमों को रेखांकित करती है।

मानवता और शांति का संदेश

छात्रों ने मानवता को कहीं न लग जाए दाग नामक कविता भी सुनाई, जो इंसानियत, दया और वैश्विक शांति के सिद्धांतों पर आधारित है। इस कविता को हिंदी में 3 रे साल की छात्रा ओरज़ू कुलदोशेवा ने सुनाया, जबकि इसका उज्बेक अनुवाद यूनिवर्सिटी की 3 रे साल की छात्रा फयोजा अब्दुरसुलोवा ने प्रस्तुत किया। इन छात्रों द्वारा किया गया यह प्रयास न केवल प्रधानमंत्री की लेखनी के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है, बल्कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच के गहरे सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान करता है।