- भारत,
- 19-Jan-2026 05:38 PM IST
- (, अपडेटेड 19-Jan-2026 05:49 PM IST)
कोच्चि की तपती धूप में जब राहुल गांधी मंच पर आए, तो उनके शब्दों में एक अलग ही धार थी। उन्होंने केवल राजनीति की बात नहीं की, बल्कि भारत के लोकतंत्र की उस बुनियादी। सोच पर प्रहार किया जिसे लेकर आज देश दो हिस्सों में बंटा नजर आता है। यूडीएफ महा पंचायत में बोलते हुए राहुल गांधी ने बीजेपी और आरएसएस की कार्यशैली पर जो सवाल उठाए हैं, उसने एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
डिस्क्लेमरयह समाचार रिपोर्ट सार्वजनिक मंच पर दिए गए राजनीतिक बयानों पर आधारित है और ज़ूम न्यूज़ किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा का समर्थन नहीं करता है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे राजनीतिक दावों की स्वतंत्र रूप से। पुष्टि करें और चुनावी प्रक्रियाओं के संबंध में आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
विचारधारा की वो गहरी खाई
राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत ही एक गहरे वैचारिक अंतर से की। उन्होंने कहा कि अगर आप कांग्रेस और बीजेपी-आरएसएस के बीच के अंतर को समझना चाहते हैं, तो आपको सत्ता के ढांचे को देखना होगा। राहुल के अनुसार, आरएसएस और भाजपा सत्ता के पूर्ण केंद्रीकरण के पक्षधर हैं और वे चाहते हैं कि सारी शक्तियां एक ही केंद्र में सिमट कर रह जाएं। इसके विपरीत, कांग्रेस सत्ता के विकेंद्रीकरण की वकालत करती है, जहां शक्ति जमीन से जुड़े लोगों और पंचायतों तक पहुंचे।आदेश बनाम संवाद: असली फर्क क्या है?राहुल गांधी ने एक बहुत ही मार्मिक उदाहरण देते हुए कहा कि बीजेपी और आरएसएस की कार्यप्रणाली 'आदेश' पर आधारित है। वे भारत के लोगों से केवल आज्ञापालन चाहते हैं और उनके लिए जनता की आवाज का कोई मोल नहीं है। राहुल ने जोर देकर कहा कि हम संवाद में विश्वास करते हैं। हम लोगों की बात सुनना चाहते हैं, उनकी समस्याओं को समझना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी-आरएसएस को जनता की आवाज से। परहेज है, वे केवल अपनी विचारधारा को थोपना जानते हैं।If you look deeply at the difference between the BJP & RSS and us, the Congress party, you will see that they stand for centralisation of power, and we stand for decentralisation of power.
— Congress (@INCIndia) January 19, 2026
They want blind compliance from the people of India; they do not want to hear the voice of… pic.twitter.com/VEKIEvr5Y3
केरल के आगामी चुनावों को देखते हुए राहुल गांधी ने। यूडीएफ और कांग्रेस नेताओं के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की। उन्होंने बताया कि दिल्ली में हुई बैठकों में सभी इस बात पर सहमत थे कि यूडीएफ पंचायत और विधानसभा चुनाव जीतने जा रही है। लेकिन राहुल ने एक कड़ा सवाल पूछा कि चुनाव जीतने के बाद आप क्या करेंगे? उन्होंने नेताओं को आगाह किया कि केवल सत्ता हासिल करना मकसद नहीं होना चाहिए, बल्कि जनता के लिए काम करना प्राथमिकता होनी चाहिए।What will you do once you win the elections? This is a question for the leaders of the UDF and the Kerala Congress.
— Congress (@INCIndia) January 19, 2026
There is an unemployment problem in the state. The UDF and the Congress party have to provide a vision for Kerala that addresses all these problems.
I am… pic.twitter.com/TVpLlKQkW8
बेरोजगारी और जनता की अनसुनी पुकार
राहुल गांधी ने केरल की सबसे बड़ी समस्या 'बेरोजगारी' पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं के पास हुनर है, लेकिन अवसर नहीं। यूडीएफ को एक ऐसा विजन तैयार करना होगा जो इन युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे सके। उन्होंने साफ किया कि जब तक नेतृत्व लोगों की जरूरतों को नहीं समझेगा, तब तक कोई भी सरकार सफल नहीं हो सकती।नेतृत्व की विनम्रता ही बनेगी जीत का आधार
अंत में, राहुल गांधी ने नेतृत्व के गुण पर बात की। उन्होंने कहा कि एक सफल नेता वही है जो लोगों के लिए सुलभ हो। नेतृत्व को लोगों के साथ घुलना-मिलना होगा और उनकी आवाज बनना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यूडीएफ का नेतृत्व विनम्र होगा और केरल के लोगों के साथ मिलकर एक नए भविष्य का निर्माण करेगा। राहुल का यह संदेश केवल केरल के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एक नई दिशा की तरह देखा जा रहा है।डिस्क्लेमरयह समाचार रिपोर्ट सार्वजनिक मंच पर दिए गए राजनीतिक बयानों पर आधारित है और ज़ूम न्यूज़ किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा का समर्थन नहीं करता है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे राजनीतिक दावों की स्वतंत्र रूप से। पुष्टि करें और चुनावी प्रक्रियाओं के संबंध में आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
