राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अब ये चुनाव सितंबर से नवंबर के बीच आयोजित किए जा सकते हैं। इस बात के संकेत राज्य सरकार द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट में दायर किए गए एक नए प्रार्थना पत्र से मिले हैं। सरकार ने अदालत से आग्रह किया है कि 31 जुलाई तक चुनाव संपन्न कराने की जो समय सीमा तय की गई थी, उसे आगे बढ़ाया जाए। सरकार ने अपने इस आवेदन में ओबीसी आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग के साथ हुए पत्राचार का विस्तार से हवाला दिया है और चुनाव टालने की आवश्यकता बताई है।
ओबीसी आरक्षण और सर्वे की स्थिति
सरकार ने अपनी दलील में इस बात पर जोर दिया है कि राजस्थान में ओबीसी वर्ग की आबादी लगभग 50 प्रतिशत है। ऐसी स्थिति में, इस बड़े वर्ग के लिए राजनीतिक आरक्षण का सटीक निर्धारण किए बिना चुनाव कराना न्यायोचित नहीं होगा। सरकार का कहना है कि जब तक ओबीसी आयोग से राजनीतिक आरक्षण को लेकर अंतिम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं है और प्रार्थना पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ओबीसी आयोग ने इस संबंध में 4 जून, 19 जून और 30 जून को जिला कलेक्टरों को आवश्यक सर्वे करने के निर्देश जारी किए थे।
वर्तमान में, प्रदेशभर में ओबीसी आंकड़ों का व्यापक सर्वे किया जा रहा है, जिसकी अवधि 10 जुलाई से 23 जुलाई तक निर्धारित की गई है। सरकार का मानना है कि इस सर्वे के आंकड़ों का विश्लेषण करने और आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना अनिवार्य है। इसके बिना चुनाव कराने से संवैधानिक और सामाजिक विसंगतियां पैदा हो सकती हैं।
निर्वाचन आयोग की समय सीमा और प्रक्रिया
राज्य सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्राप्त पत्र का संदर्भ देते हुए बताया कि एक बार आरक्षण का पूरा विवरण मिल जाने के बाद, पूरी चुनाव प्रक्रिया को संपन्न करने में कम से कम 90 दिन का समय लगेगा। निर्वाचन आयोग के आकलन के अनुसार, नगरीय निकाय चुनावों को दो चरणों में पूरा करने के लिए लगभग 40 दिन की आवश्यकता होगी। वहीं, पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव जो कि चार चरणों में कराए जाने प्रस्तावित हैं, उनके लिए करीब 50 दिन का समय चाहिए होगा।
सरकार के इस जवाब से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि यदि 31 अगस्त तक आरक्षण का पूरा विवरण निर्वाचन आयोग को उपलब्ध करा दिया जाता है, तो सितंबर के महीने से लेकर नवंबर के बीच चुनाव कराए जा सकते हैं। यह नई समय सीमा सरकार की तैयारियों और आयोग की कार्यप्रणाली पर निर्भर करेगी।
हाईकोर्ट का पिछला आदेश और अवमानना याचिका
उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने इससे पहले सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के कड़े निर्देश दिए थे। हालांकि, उस समय भी दोनों पक्षों ने समय बढ़ाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 31 जुलाई की अंतिम समय सीमा तय की थी और स्पष्ट किया था कि इस तारीख तक हर हाल में चुनाव करा लिए जाएं। साथ ही, ओबीसी आयोग को भी अपनी रिपोर्ट 20 जून तक प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।
निर्धारित समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया शुरू न होने के कारण अब कानूनी मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। याचिकाकर्ता और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के साथ गिरराज सिंह देवंदा ने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है और इस महत्वपूर्ण मामले पर मंगलवार को जस्टिस इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ में सुनवाई होनी है, जिसमें सरकार के नए प्रार्थना पत्र पर भी विचार किया जाएगा।
