राजस्थान पंचायत चुनाव में देरी: निर्वाचन आयोग की चिट्ठी से नया मोड़, नवंबर तक टल सकते हैं चुनाव

राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव अब समय पर होना मुश्किल लग रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट और वार्डों के निर्धारण में लगने वाले समय के कारण चुनाव प्रक्रिया में देरी होगी। आयोग ने सरकार से हाई कोर्ट में समय सीमा बढ़ाने की अर्जी लगाने को कहा है।

राजस्थान में स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव समय पर संपन्न होना अब बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। हालांकि राजस्थान हाई कोर्ट ने जुलाई के अंत तक चुनाव कराने की समय सीमा तय की थी, लेकिन जमीनी हकीकत और कानूनी प्रक्रियाओं के चलते इसमें एक बड़ा पेंच फंस गया है और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पंचायती राज विभाग के सचिव को लिखे गए एक ताजा पत्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने में अभी लंबा वक्त लग सकता है।

ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट और वार्ड निर्धारण का समय

आयोग के सचिव द्वारा लिखे गए पत्र के विवरण के अनुसार, राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग द्वारा पंचायती राज संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण को लेकर अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्ट 14 अगस्त 2026 तक राज्य सरकार को सौंपे जाने की संभावना जताई गई है। इस रिपोर्ट के प्राप्त होने के बाद, पंचायती राज विभाग द्वारा अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और महिला वर्ग के लिए वार्डों का आरक्षण तय करने की विस्तृत कवायद शुरू की जाएगी और विभाग का अनुमान है कि यह पूरी प्रक्रिया 31 अगस्त 2026 तक ही पूरी की जा सकेगी।

हाई कोर्ट के आदेश और बदली हुई परिस्थितियां

उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाई कोर्ट ने 22 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था, जिसमें 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में चुनाव कराने के सख्त निर्देश दिए गए थे। अब बदली हुई परिस्थितियों और आरक्षण निर्धारण में लगने वाले समय को देखते हुए, निर्वाचन आयोग ने हाई कोर्ट में समय सीमा बढ़वाने के लिए अर्जी लगाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्य सरकार के पाले में डाल दी है। आयोग का मानना है कि जब तक आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संभव नहीं है।

रिपोर्ट मिलने के बाद भी 90 दिन का अनिवार्य समय

राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तकनीकी और प्रशासनिक आवश्यकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा है कि जब सरकार आरक्षण का पूरा निर्धारण करके फाइनल रिपोर्ट आयोग को सौंप देगी, उसके बाद भी पूरी चुनाव प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में कम से कम 90 दिन यानी करीब 3 महीने का समय लगेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस 90 दिन की अवधि में सभी सरकारी और सार्वजनिक अवकाश भी शामिल होंगे। इस गणना के अनुसार, यदि अगस्त के अंत तक रिपोर्ट मिलती है, तो चुनाव प्रक्रिया नवंबर तक खिंच सकती है।

चरणबद्ध चुनाव प्रक्रिया का खाका

प्रदेश में शहरी और पंचायती राज निकायों के पुनर्गठन के बाद स्थानीय निकायों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। सीमित संसाधनों और सुरक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आयोग ने चुनाव को अलग-अलग चरणों में कराने की योजना तैयार की है। ग्रामीण पंचायती राज चुनाव के लिए आयोग ने कुल 4 चरणों का प्रस्ताव रखा है। प्रेस नोट जारी होने से लेकर पूरी प्रक्रिया संपन्न होने में लगभग 50 दिन का समय लगेगा। वहीं, शहरी नगरीय निकाय चुनाव 2 चरणों में पूरे किए जाएंगे, जिसमें लगभग 40 दिन का समय लगने की संभावना है। इन चरणों के माध्यम से आयोग शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना चाहता है।