अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर पिछले कुछ समय से चल रहे विवादों के बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। यह पहला अवसर है जब उन्होंने इन गंभीर आरोपों पर अपनी प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया दी है। चंपत राय ने एक पत्र के माध्यम से अपनी बात रखी है, जिसमें उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को पूरी तरह से निराधार और अनर्गल करार दिया है। उनके इस बयान से इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है, क्योंकि अब तक वे इस विषय पर मौन थे।
आरोपों पर चंपत राय की सफाई
राम भक्तों के नाम लिखे अपने पत्र में चंपत राय ने स्पष्ट किया है कि उनके खिलाफ जो भी बातें कही जा रही हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप न केवल झूठे हैं, बल्कि वे उनकी छवि को धूमिल करने का एक प्रयास हैं। चंपत राय ने पत्र में लिखा कि वर्तमान में उन्हें लेकर समाज में कई तरह की चर्चाएं और भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। उन्होंने इन सभी चर्चाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे किसी भी जांच से डरने वाले नहीं हैं और समय आने पर वे तथ्यों के साथ अपनी बात रखेंगे।
SIT की रिपोर्ट का इंतजार
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया है जो पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच कर रहा है और चंपत राय ने अपने पत्र में इस जांच का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि SIT की फाइनल रिपोर्ट अभी आनी बाकी है और जब तक यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो जाती, तब तक उन्होंने मौन धारण करने का निर्णय लिया है। उन्होंने राम भक्तों को विश्वास दिलाया कि जैसे ही जांच दल अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगा, वे सामने आएंगे और हर एक सवाल का विस्तार से जवाब देंगे। उनका मानना है कि आधिकारिक रिपोर्ट ही सच्चाई को सामने लाने का सबसे सही माध्यम होगी।
45 वर्षों का सार्वजनिक जीवन
अपने चरित्र और निष्ठा पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए चंपत राय ने अपने अतीत के पन्नों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि संगठन की ओर से उन्हें अक्टूबर 1991 में अयोध्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तब से लेकर अब तक वे निरंतर राम काज में लगे हुए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे पिछले 45 वर्षों से एक प्रचारक के रूप में राष्ट्र और समाज की सेवा कर रहे हैं। चंपत राय ने भावुक होते हुए लिखा कि उनका जीवन एक खुली किताब की तरह है, जिसमें छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी को प्राथमिकता दी है और वे संगठन के प्रति पूरी तरह जवाबदेह हैं।
