राम मंदिर चंदा चोरी: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट को भेजा नोटिस, SIT से मांगी रिपोर्ट

अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एसआईटी से अब तक की जांच की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में मांगी है।

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चंदा चोरी के गंभीर आरोपों को लेकर आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई शुरू हुई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए देश की शीर्ष अदालत ने राम मंदिर ट्रस्ट को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को अब तक की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि एसआईटी को यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा करनी होगी ताकि जांच की गोपनीयता और निष्पक्षता बनी रहे।

तीन सदस्यीय बेंच और सुनवाई का विवरण

इस संवेदनशील मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय बेंच कर रही है। सुनवाई की शुरुआत में सॉलिसिटर जनरल (एसजी) ने अदालत को सूचित किया कि राज्य के संबंधित प्राधिकारी इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं। हालांकि, अदालत ने राम मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया ताकि मामले के सभी पहलुओं की न्यायिक समीक्षा की जा सके। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी नहीं किया है, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वे इस मामले में कोर्ट की पूरी सहायता करेंगे और जांच प्रक्रिया में हर संभव सहयोग प्रदान करेंगे।

चार याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट वर्तमान में इस मामले से जुड़ी कुल 4 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रहा है। इन याचिकाओं में हिंदू धर्मपरिषद् की याचिका भी शामिल है, जिसमें मांग की गई है कि चंदा चोरी की पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में होनी चाहिए ताकि प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी बनी रहे। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए शीर्ष अदालत का हस्तक्षेप अनिवार्य है। इन याचिकाओं में वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा दायर एक रिट याचिका के साथ-साथ अजय कुमार राय और आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह की याचिकाएं भी शामिल हैं, जो मामले की पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

सीबीआई जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग

अदालत के समक्ष रखी गई मांगों में जांच के दायरे को व्यापक बनाने पर जोर दिया गया है। कुल याचिकाओं में से 2 अलग-अलग याचिकाओं में पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग की गई है। वहीं, एक अन्य याचिका में मांग की गई है कि सीबीआई की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की जाए जो न केवल जांच करे बल्कि सभी महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने का काम भी करे। इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने मंदिर ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी पुरजोर मांग की है ताकि चंदे के पैसे के प्रबंधन में हुई किसी भी संभावित गड़बड़ी या अनियमितता का पर्दाफाश हो सके।

कांग्रेस के आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस बीच, राम मंदिर चंदा प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद भी गहरा गया है और कांग्रेस पार्टी ने चंदा चोरी की प्रक्रिया में गंभीर धांधली का आरोप लगाते हुए इस पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग दोहराई है। कांग्रेस प्रवक्ता अजय उपाध्याय ने जयपुर में एक प्रेस वार्ता के दौरान इसे "आस्था के नाम पर लूट" करार दिया और उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर जो निधि जुटाई गई थी, वह भाजपा और आरएसएस के लिए राजनीतिक लाभ का साधन बन गई है। " विपक्ष अब इस पूरे चंदा प्रबंधन व्यवस्था की न्यायिक जांच की मांग पर अड़ा हुआ है ताकि श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा की जा सके।