राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, साजिश की नई और चौंकाने वाली परतें खुलती जा रही हैं। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में बैंक के दो कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट रूप से उजागर हुई है। पुलिस को इस मामले में पुख्ता साक्ष्य मिले हैं, जिसके आधार पर जल्द ही दोनों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। जांच में यह बात सामने आई है कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे में हेरफेर केवल गणनाकर्मियों के बूते संभव नहीं था और पुलिस और एसआईटी की जांच में बैंक के दो कर्मचारियों की भूमिका न केवल संदिग्ध बल्कि सक्रिय पाई गई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि बैंककर्मियों की मिलीभगत के बिना दानराशि की चोरी और रिकॉर्ड में हेरफेर इतने लंबे समय तक संभव नहीं था।
चोरी का तरीका: कैमरों के सामने घेरा और रजिस्टर में हेरफेर
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि आरोपी गणना के समय सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से बचने के लिए एक विशेष तरीका अपनाते थे। वे अपने साथियों के साथ मिलकर कैमरों के सामने एक घेरा बना लेते थे और उसी आड़ में नकदी निकाल लेते थे। यदि वे मौके पर रकम नहीं निकाल पाते थे, तो वे गणना रजिस्टर में हेरफेर करते थे। वे जानबूझकर रजिस्टर में 4 से 5 लाख रुपये कम दर्ज करते थे और बाद में बैंक में रकम जमा करते समय उतनी राशि निकाल लेते थे। इस पूरी प्रक्रिया में बैंककर्मियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया जा रहा है, क्योंकि उनकी निगरानी में ही यह सारा कार्य संपन्न होता था।
एसबीआई बैंक में छापेमारी और कर्मचारियों को नोटिस
अयोध्या पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एसबीआई बैंक में छापेमारी की है। विवेचक क्षेत्राधिकारी अयोध्या के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बैंक पहुंचकर कर्मचारियों से पूछताछ की। मंदिर में दान पात्र में नोटों की गणना और कलेक्शन का काम एसबीआई के पास ही था। दानराशि की गणना के दौरान बैंक की ओर से संविदाकर्मी तैनात किए गए थे, जबकि पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी बैंक के दो कर्मचारियों रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप के पास थी। ये दोनों कर्मचारी गणना से लेकर रकम बैंक में जमा होने तक हर चरण में मौजूद रहते थे और पुलिस ने अब गगनदीप और रत्नेश चतुर्वेदी को नोटिस जारी कर दिया है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
आरोपी का आलीशान मकान और वरिष्ठ अधिकारी पर संदेह
जांच एजेंसियां अब आरोपी लवकुश मिश्रा से जुड़े एक नए बने दो मंजिला घर की भी गहनता से जांच कर रही हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, अयोध्या के शहादतगंज इलाके में यह घर बहुत ही तेज गति से बनाया गया और महज 3 से 4 महीनों के भीतर ही लगभग बनकर तैयार हो गया। इतनी कम अवधि में दो मंजिला मकान का निर्माण जांच के घेरे में है। इसके अलावा, सूत्र बताते हैं कि जांच एजेंसियां एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं और अधिकारियों का मानना है कि निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारियों के सहयोग के बिना इतने संगठित तरीके से चढ़ावे में हेरफेर लंबे समय तक चलना नामुमकिन था। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।
