सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद बंद की अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार

सऊदी अरब ने ड्रोन हमलों के बाद अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। हूतियों द्वारा मायून द्वीप पर कब्जे और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति संकट गहरा गया है, जिससे कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।

सऊदी अरब ने एक बड़े सुरक्षा घटनाक्रम के बाद अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। यह फैसला पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों को निशाना बनाकर किए गए कई ड्रोन हमलों के बाद लिया गया है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल उत्पादक क्षेत्रों से कच्चे तेल को लाल सागर के किनारे स्थित यानबू बंदरगाह तक ले जाने का मुख्य जरिया है। इस पाइपलाइन का बंद होना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि यह दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइनों में से एक है।

होर्मुज का विकल्प और पाइपलाइन की अहमियत

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के एक प्रमुख विकल्प के रूप में देखा जाता है। होर्मुज के रास्ते में ईरानी खतरों और तनाव के कारण जब तेल की आवाजाही बाधित होती है, तब सऊदी अरब इसी पाइपलाइन का उपयोग करके दुनिया के बाजारों तक अपना तेल पहुंचाता है। जून की शुरुआत तक इस पाइपलाइन के माध्यम से यानबू तक तेल भेजने की क्षमता बढ़कर 50 लाख बैरल प्रतिदिन से भी अधिक हो गई थी। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के लिहाज से इसे फिलहाल बंद किया गया है ताकि नुकसान का आकलन और मरम्मत की जा सके।

ड्रोन हमले और हुआ नुकसान

सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अनुसार, गुरुवार को कई ड्रोनों ने पाइपलाइन के रास्ते में आने वाले पंपिंग स्टेशनों को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों ने जानकारी दी है कि इस हमले में कई पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए हैं और सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों में एक स्टेशन पर आग लगने से भारी नुकसान और दूसरे स्थान से काला धुआं उठता हुआ साफ देखा गया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये ड्रोन इराक की दिशा से आए थे और इस हमले में कुछ लोग घायल हुए हैं और बुनियादी ढांचे को भी क्षति पहुंची है, जिसकी मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर जारी है।

इराक के साथ कूटनीतिक स्थिति

सऊदी अरब ने इस हमले के बाद एक संयमित रुख अपनाया है और सऊदी सरकार ने कहा है कि इराकी प्रधानमंत्री के विशेष अनुरोध पर वह फिलहाल इस हमले का कोई सैन्य जवाब नहीं देगा। इसका उद्देश्य इराक सरकार को अपनी जमीन से होने वाले ऐसे हमलों को रोकने और जांच करने का पर्याप्त मौका देना है और इराक ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह शांति चाहता है लेकिन अपनी रक्षा के अधिकार को सुरक्षित रखता है।

हूतियों का मायून द्वीप पर कब्जा

क्षेत्र में तनाव तब और बढ़ गया जब यमन के हूती लड़ाकों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बीच स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मायून द्वीप (जिसे पेरिम द्वीप भी कहा जाता है) पर कब्जा कर लिया। यह एक छोटा ज्वालामुखीय द्वीप है जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक के केंद्र में स्थित है। हूतियों ने इससे पहले मोचा शहर पर भी अपना नियंत्रण स्थापित किया था, जो वहां से लगभग 80 किमी दूर है। बाब-अल-मंदेब के रास्ते जहाजों की आवाजाही 2023 के अंत से हूती हमलों के कारण पहले ही 60 प्रतिशत तक घट चुकी है। अब इस द्वीप पर कब्जे से सऊदी अरब और अन्य देशों के लिए तेल की सप्लाई का रास्ता और भी जोखिम भरा हो गया है।

तेल की कीमतों में उछाल और उत्पादन में कमी

इन तमाम संकटों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई है। इसके साथ ही सऊदी अरब ने ओपेक (OPEC) को सूचित किया है कि पिछले महीने उसका कच्चे तेल का उत्पादन 1990 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पंपिंग स्टेशनों की मरम्मत करना पाइपलाइन को ठीक करने की तुलना में सरल हो सकता है, लेकिन जब तक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक आपूर्ति बहाल करना चुनौतीपूर्ण होगा।

ईरान का रुख और बातचीत की संभावना

ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम में हूतियों का खुला समर्थन किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब से अपील की है कि वह हूती नियंत्रित क्षेत्रों की नाकाबंदी को खत्म करे और शांति वार्ता शुरू करे। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता ने यह भी कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी भविष्य के समझौते में यमन के मुद्दे को शामिल करना अनिवार्य होगा। हालांकि, तनाव कम करने के लिए गुरुवार को दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत होने की खबरें भी आई हैं। सऊदी अरब ने दोहराया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।