हूती विद्रोहियों से घिरे सऊदी अरब ने मांगी अमेरिका से मदद: ट्रंप ने सीधे हमले से किया इनकार

यमन में हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत से चिंतित सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप से सैन्य मदद मांगी है। पाकिस्तान और तुर्की से सहयोग न मिलने के बाद सऊदी ने अमेरिका का रुख किया, लेकिन ट्रंप ने सीधे हमले के बजाय केवल खुफिया जानकारी साझा करने पर सहमति जताई है।

मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं क्योंकि सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत से गंभीर संकट का सामना कर रहा है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, जिन्हें एमबीएस के नाम से भी जाना जाता है, ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बात की है और हूतियों के खिलाफ सीधे अमेरिकी सैन्य हमले की मांग की है और यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हूती लड़ाके तेजी से क्षेत्रीय बढ़त हासिल कर रहे हैं, जिससे सऊदी नेतृत्व में अपनी सीमाओं और रणनीतिक हितों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा हो गई है।

एमबीएस की ट्रंप से सीधी अपील और हूतियों की बढ़त

दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से मिली एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत में स्थिति की गंभीरता साफ झलक रही थी। पहली फोन कॉल के दौरान, एमबीएस ने यमन में जमीनी स्तर पर बिगड़ते हालात की विस्तृत जानकारी दी। इसके कुछ ही घंटों बाद, उन्होंने दूसरी बार फोन किया और स्पष्ट रूप से मांग की कि अमेरिका हूती ठिकानों पर सैन्य हमले करे। हूतियों ने हाल ही में मोचा शहर पर कब्जा करके एक बड़ी रणनीतिक जीत हासिल की है और वे अब यमन के दक्षिणी क्षेत्रों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बढ़त के कारण सऊदी समर्थित यमनी बलों को पीछे हटना पड़ा है, जिससे विद्रोहियों का प्रभाव क्षेत्र बढ़ता जा रहा है।

ट्रंप का रुख और अमेरिकी सैन्य सहयोग की सीमा

रियाद की बार-बार की गई अपीलों के बावजूद, राष्ट्रपति ट्रंप ने यमन में बढ़ते संघर्ष पर अपनी चिंता तो व्यक्त की, लेकिन उन्होंने हूती समूह के खिलाफ सीधे अमेरिकी हमले करने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन फिलहाल इस क्षेत्र में एक और सीधे युद्ध में उतरने से बच रहा है। हालांकि, वाशिंगटन ने सऊदी अरब को पूरी तरह अकेला नहीं छोड़ा है। अमेरिका ने सऊदी अरब को हूतियों के बारे में महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी और टारगेटिंग डेटा देने पर सहमति जताई है। इस सहयोग का उद्देश्य सऊदी सेना को उनके अपने अभियानों में मदद करना है, ताकि वे हूतियों की गतिविधियों पर सटीक नजर रख सकें।

रणनीतिक जलमार्ग और वैश्विक व्यापार पर खतरा

सऊदी अरब के लिए यह चिंता केवल यमन की क्षेत्रीय जंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे रणनीतिक और आर्थिक निहितार्थ हैं। हूती लड़ाके रणनीतिक तटीय इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे वे बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के और करीब पहुंच गए हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और विशेष रूप से सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हूतियों की इस बढ़त के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया है। इसके अलावा, ईरान पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए समुद्री आवाजाही पर दबाव बना रहा है। यदि हूतियों का बाब अल-मंडेब पर कब्जा हो जाता है, तो ईरान के पास अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों पर दबाव बनाने का एक और बड़ा जरिया होगा।

पाकिस्तान और तुर्की से निराशा के बाद अमेरिका की शरण

सऊदी अरब द्वारा अमेरिका से मदद मांगना इस बात का भी संकेत है कि उसे अपने क्षेत्रीय सहयोगियों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला है। मक्का पैक्ट के बावजूद, पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी अरब की सैन्य मदद करने से इनकार कर दिया था। इसी पृष्ठभूमि में एमबीएस को वाशिंगटन का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। वर्तमान में, लगभग 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी पहले से ही सऊदी अरब में मौजूद हैं, जो गैर-गतिशील सहायता प्रदान कर रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर गुरुवार को सऊदी अरब पहुंचे और वहां के नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं।

भविष्य की चुनौतियां और अमेरिकी रणनीति

वाशिंगटन स्थित सऊदी दूतावास और व्हाइट हाउस ने फिलहाल इन फोन कॉल्स और बैठकों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। अमेरिका की वर्तमान प्राथमिकता लाल सागर में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और खुला रखना है, जबकि वह यमन के व्यापक संघर्ष की जिम्मेदारी क्षेत्रीय सहयोगियों पर ही छोड़ना चाहता है। सऊदी अरब जहां हूतियों को रोकने के लिए अमेरिकी मिसाइलों और हवाई हमलों की उम्मीद कर रहा है, वहीं ट्रंप प्रशासन सीधे युद्ध का मोर्चा खोलने के बजाय खुफिया और सैन्य सहयोग तक ही सीमित रहना चाहता है। अब देखना यह होगा कि क्या हूतियों का बढ़ता खतरा ट्रंप को अपना फैसला बदलने पर मजबूर करेगा या नहीं।