ब्रिक्स समिट के लिए दिल्ली पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, पीएम मोदी से होगी मुलाकात

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। 8 साल बाद किसी ईरानी राष्ट्रपति की यह पहली भारत यात्रा है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चाबहार पोर्ट और ऊर्जा सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। यह दौरा कूटनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 8 साल के लंबे अंतराल के बाद ईरान का कोई राष्ट्रपति भारत की यात्रा पर आया है। इससे पहले साल 2018 में हसन रूहानी ने भारत का दौरा किया था। राष्ट्रपति पेजेश्कियान की आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने वाली है, जिसमें दोनों देशों के बीच आपसी हितों और क्षेत्रीय स्थिरता पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

एकतरफावाद का मुकाबला और ब्रिक्स का दृष्टिकोण

तेहरान से रवाना होने से पहले राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अमेरिका और पश्चिमी शक्तियों को एक कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स समूह में एकतरफावाद का मुकाबला करने और अपने सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की अपार क्षमता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक लेन-देन में डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। पेजेश्कियान ने इस वैश्विक समूह के 18वें शिखर सम्मेलन को बहुपक्षवाद को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर करार दिया है।

ब्रिक्स की वैश्विक शक्ति और विस्तार

वैश्विक मामलों में ब्रिक्स की स्थिति का उल्लेख करते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने बताया कि इस समूह में अब 21 सदस्य शामिल हैं। इनमें 11 मुख्य सदस्य और 10 नए सदस्य हैं जिन्हें ब्रिक्स प्लस के नाम से जाना जाता है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया कि ब्रिक्स के सदस्य देश मिलकर दुनिया की 45 फीसदी से अधिक आबादी और लगभग 35 फीसदी भू-भाग का प्रतिनिधित्व करते हैं। इतनी बड़ी भागीदारी इस समूह को विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण क्षमता प्रदान करती है। पेजेश्कियान के अनुसार, ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखते हुए आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को विकसित करने में सक्षम बनाना है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता और डॉलर से दूरी

इस वर्ष के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय एकजुटता, स्थिरता, प्रतिरोध और नवाचार पर केंद्रित है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि इस दृष्टिकोण के माध्यम से आर्थिक, वित्तीय, औद्योगिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ेगा। उन्होंने ब्रिक्स बैंक की स्थापना का भी जिक्र किया, जो सदस्य देशों के बीच निवेश और संयुक्त गतिविधियों को सरल बनाने के लिए बनाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समूह देशों को डॉलर पर निर्भरता के बिना आर्थिक विकास के अवसर प्रदान करने और बड़ी ताकतों की अत्यधिक मांगों के खिलाफ खड़े होने के लिए तैयार कर रहा है।

भारत-ईरान द्विपक्षीय वार्ता और चाबहार पोर्ट

ब्रिक्स समिट के इतर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान के बीच होने वाली बैठक में चाबहार पोर्ट, तेल-गैस, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, और भारत ने ईरान के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल में भी निवेश किया है। इस पोर्ट के माध्यम से भारत पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक अपनी पहुंच बना सकता है। इसे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जोड़कर रूस और यूरोप तक कनेक्टिविटी मजबूत करने की योजना है। इसके अलावा, ईरान भारत को अधिक क्रूड ऑयल और एलपीजी सप्लाई करने का इच्छुक है। दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने और ब्रिक्स के वित्तीय तंत्र का उपयोग करने पर भी चर्चा कर सकते हैं। बैठक में पश्चिम एशिया के हालात और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता पर भी बात हो सकती है।