प्रयागराज के माघ मेले में पिछले कई दिनों से जारी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद अब एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक मोड़ पर आ गया है। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने खुलकर अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया है और जबलपुर में आयोजित नर्मदा जन्मोत्सव के दौरान उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़े सवाल उठाए और कहा कि तीन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ खड़े हैं। उन्होंने प्रशासन की उस कार्रवाई की निंदा की जिसमें निर्दोष ब्राह्मणों के साथ मारपीट की गई थी। सदानंद सरस्वती ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को किसी भी शंकराचार्य। का सर्टिफिकेट मांगने का कोई कानूनी या धार्मिक अधिकार नहीं है।
असली बनाम नकली हिंदू की नई बहस
माघ मेले में अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद ने तिरंगा फहराते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आज की लड़ाई किसी बाहरी दुश्मन से नहीं बल्कि 'असली हिंदू' और 'नकली हिंदू' के बीच है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह पांडव धर्म के साथ थे और कौरव सत्ता के मद में चूर थे, वैसी ही स्थिति आज बनी हुई है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा। कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चाहेंगे, तभी वह संगम में स्नान करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक समझदार नेता को दबाया जा रहा है और सनातन परंपरा का पालन करने वालों पर प्रहार किया जा रहा है।
केशव प्रसाद मौर्य की अपील और प्रशासन का रुख
इस पूरे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज पहुंचकर शांति की अपील की। उन्होंने कहा कि वह शंकराचार्य के चरणों में शीश झुकाकर निवेदन करते। हैं कि वे संगम में स्नान कर इस विवाद को समाप्त करें। हालांकि, अविमुक्तेश्वरानंद ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर मौर्य का बस चलता तो वह कब का समाधान कर चुके होते, लेकिन उन्हें ऊपर से रोका जा रहा है। प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दो नोटिस जारी किए हैं, जिसमें उनकी पदवी और मौनी अमावस्या के दिन हुए हंगामे पर सवाल उठाए गए हैं। प्रशासन ने उन्हें माघ मेले से प्रतिबंधित करने की चेतावनी भी दी है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। सपा प्रवक्ता निधि यादव ने कहा कि भाजपा अपने विरोधियों को कुचलने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, चाहे वे धर्मगुरु ही क्यों न हों। उन्होंने इसे भाजपा का डर बताया। वहीं, संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि अब तक केवल अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादती हो रही थी, लेकिन अब हिंदू धर्मगुरुओं का भी अपमान किया जा रहा है जो बेहद चिंताजनक है। दूसरी ओर, आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने अलग सुर अलापते हुए कहा कि शंकराचार्य को हठ छोड़कर अपने मठ वापस जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ लोग शंकराचार्य को 'शुक्राचार्य' बनाने की साजिश। रच रहे हैं ताकि देश की एकता को खंडित किया जा सके।
कुमार विश्वास की भावुक अपील
प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता बरतने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि भगवा धारण करने वाले संतों के साथ संवाद करते समय मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। कुमार विश्वास ने शंकराचार्य से भी प्रार्थना की कि वे। अपना सात्विक क्रोध त्यागें और सभी पर अपनी कृपा बरसाएं। उन्होंने एक सामान्य नागरिक के तौर पर किसी भी भूल के लिए क्षमा भी मांगी। फिलहाल, माघ मेले का यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है और यह आने वाले दिनों में और भी गहरा सकता है।[DISCLAIMER_START]यह लेख विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। ज़ूम न्यूज़ किसी भी धार्मिक विवाद में पक्षपात नहीं करता है।